पंजाब सरकार ने डिजिटाइज्ड जन्म प्रमाण पत्र जमा करने की समयसीमा बढ़ाई। कक्षा 8 के छात्रों को 30 अक्टूबर 2026 तक और 9-10 को भी राहत मिली।
पंजाब सरकार ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए डिजिटाइज्ड जन्म प्रमाण पत्र (Digitised Birth Certificate) जमा करने की समयसीमा बढ़ा दी है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने घोषणा की कि अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यूनिफाइड स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर जन्म प्रमाण पत्र अपलोड करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई दस्तावेजों की देरी के कारण प्रभावित न हो।
कक्षा 8 के छात्रों को 30 अक्टूबर 2026 तक का समय
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि जिन कक्षा 8 के विद्यार्थियों के पास अभी तक डिजिटाइज्ड जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, वे अब 30 अक्टूबर 2026 तक इसे बनवाकर Unified Student Registration Portal पर अपलोड कर सकते हैं।
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कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को भी राहत
सरकार ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों को भी बड़ी राहत दी है। अब वे अगले शैक्षणिक सत्र के रजिस्ट्रेशन शुरू होने तक अपने जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित आवश्यक संशोधन और अपडेट करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद लिया गया फैसला
हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि यह निर्णय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की मंजूरी के बाद लिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विद्यार्थी को केवल दस्तावेजी प्रक्रिया में देरी की वजह से प्रवेश या पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार Unified Student Registration Portal के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रियाएं बच्चों की शिक्षा में बाधा न बनें।
स्कूल प्रमुखों को दिए गए विशेष निर्देश
हरजोत सिंह बैंस ने सभी सरकारी और संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अभिभावकों के साथ समन्वय बनाकर संशोधित समयसीमा के भीतर सभी विद्यार्थियों का पंजीकरण और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करवाएं।
छात्रों के हित सर्वोपरि
उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य एक पेपरलेस, पारदर्शी और आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित करना है। लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र की शिक्षा केवल औपचारिक दस्तावेजों की कमी के कारण प्रभावित न हो।
यह फैसला डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और अभिभावकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिससे हजारों छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
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