सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, हरियाणा सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया, लेकिन हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा गया है।

हरियाणा सरकार: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार की नीति को हरियाणा के लोगों को भर्ती परीक्षाओं में अतिरिक्त अंक देने से रोक दिया गया था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाशकालीन पीठ ने हरियाणा सरकार की नीति को ‘‘लोकलुभावन उपाय’’ बताते हुए हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गए सामाजिक-आर्थिक नियमों को हाई कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था, जो कुछ वर्गों के उम्मीदवारों को राज्य सरकारी पदों पर अधिक अंक देते थे।

कानून ने बताया लोकलुभावन उपाय

पीठ ने कहा, “संबंधित निर्णय पर गौर करने के बाद, हमें इसमें कोई त्रुटि नहीं नजर आई। विशेष अनुमति याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू करते हुए कहा, ‘‘अपने प्रदर्शन के आधार पर एक मेधावी उम्मीदवार को 60 अंक मिलते हैं, किसी और को भी 60 अंक मिले हैं, लेकिन केवल पांच कृपांक के कारण उसके अंक बढ़ गए हैं.’’ इये सभी लोकलुभावन उपाय हैं। किसी को पांच अंक अतिरिक्त मिलने के कदम का आप किस तरह बचाव कर सकते हैं?’’

अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी

नीति को सही ठहराते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने कृपांक नीति की शुरुआत की, जिसके माध्यम से वे लोगों को सरकारी पदों से वंचित कर दिया गया है। वेंकटरमणी ने हाई कोर्ट के निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक-आर्थिक मानदंडों का लागू होना लिखित परीक्षा के बाद हुआ था, न कि CET के बाद। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि अपील खारिज कर दी।

हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की गई

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 31 मई को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। 31 मई को हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की उस नीति को खारिज कर दिया था जिसके तहत ‘‘ग्रुप C और ग्रुप D’’ पदों के लिए CET में कुल अंकों में राज्य के निवासी अभ्यर्थी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर पांच प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने थे।कोर्ट ने कहा कि कोई भी राज्य पांच प्रतिशत अंकों का लाभ देकर केवल अपने नागरिकों को रोजगार दे सकता है। कोर्ट ने कहा, ‘‘प्रतिवादी (राज्य सरकार) ने पद के लिए आवेदन करने वाले समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों के लिए एक कृत्रिम वर्गीकरण किया है।‘’

क्या राज्य सरकार का निर्णय था?

दरअसल, राज्य सरकार की नीति, जो मई 2022 में लागू की गई, इसने 63 समूहों में 401 श्रेणियों में CET की नौकरियों को प्रभावित किया। 10 जनवरी 2023 को घोषित CET परिणामों को भी हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया, साथ ही 25 जुलाई 2023 को घोषित CET परिणामों को भी. हाई कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवारों के CET अंकों के आधार पर एक पूरी तरह से नई मेधा सूची बनाई जाए।