हाथ में संतान रेखाएं बेहद  ही जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कितनी संतान होंगी, संतान रेखाओं से इसका संकेत मिलता है।  । लेकिन संतान रेखाओं को मणिबंध रेखा और अंगूठे के नीचे मिलने वाली छोटी रेखा भी प्रभावित करती हैं। हाथ में अस्पष्ट और टूटी रेखाओं से बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। यदि हाथ में मणिबंध रेखा कलाई की ओर झुकी हुई है और वह हथेली में प्रवेश करती हुई प्रतीत होती है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को संतान पाने में दुख हो सकता है।
हस्तरेखा विज्ञान के मुताबिक यदि हाथ में बुध पर्वत अत्यधिक उभरी हुई स्थित है और संतान रेखा स्पष्ट है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को गुणवान और संस्कार संतान की प्राप्ति होगी। ऐसे लोगों को एक से अधिक पुत्र की प्राप्ति होती है। इसी तरह हथेली में संतान रेखा उभरी हुई और स्पष्ट हो तो व्यक्ति को संतान से स्नेह और सुख की प्राप्ति होती है। इस तरह के लोग को किसी एक संतान से अत्यधिक मोह रहता है।

आपको बता दें यदि पति-पति दोनों के हाथ में स्पष्ट संतान रेखा होने से जातक बच्चों को अत्यधिक प्यार करता है और उसका व्यवहार भी स्नेह भरा होता है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार संतान रेखा के प्रथम भाग में द्वीप का निशान होने पर संतान जन्म के वक्त कमजोर रहती है, लेकिन यदि यह रेखा आगे स्पष्ट हो तो संतान का स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है। यदि संतान रेखा के अंत में द्वीप का निशान होता है तो बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद कम रहती है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार बुध क्षेत्र पर हृदय रेखा दो या तीन शाखा में विभाजित हो जाए और शाखा स्पष्ट रहे तो व्यक्ति को संतान सुख मिलता है। विवाह रेखा पर खड़ी और सीधी रेखाएं स्वस्थ पुत्र और टेढ़ी-मेढ़ी कमजोर रेखा का संकेत देती है।