बिजनेस डेस्‍क। आने वाले दिनों में 3 साल की फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर टैक्‍स सेविंग का लाभ मिल सकता है। इंडियन बैंक एसोसिएशन की ओर से सरकार को सुझाव दिया गया है। आईबीए का मानना है कि हाई रिटर्न प्रोडक्‍ट्स काफी दबाव का सामना कर रहे हैं। मौजूदा समय में लंबी अवधि की 5 साल की FD पर टैक्स में छूट मिलती है, जिसे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) तीन साल के लॉक-इन FD तक भी बढ़ाना चाहता है। आईबीए ने वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव दिया कि बाजार में उपलब्ध अन्य वित्तीय उत्पादों (जैसे ईएलएसएस) की तुलना में, टैक्‍स सेवर्स की फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट में दिलचस्‍पी काफी कम हो गई है। यदि लॉक-इन पीरियड कम हो जाता है तो यह एफडी को और भी अधि‍क आकर्षक बना देगा और ज्‍यादा रिटर्न भी देगा।

ब्‍याज दरों में गिरावट से स्‍मॉल सेविंग स्‍कीम है ज्‍यादा आकर्षक
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उधारकर्ताओं के लिए बढ़ाए गए अल्ट्रा-लो ब्याज दरों की व्यवस्था के कारण सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) जैसे अन्य उत्पादों के संबंध में एफडी कम आकर्षक हो गए हैं। हालांकि, कम ब्याज दरों से जमाकर्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे अन्य छोटी बचत योजनाएं, जो उच्च रिटर्न प्रदान करती हैं, बचतकर्ताओं के लिए अधिक आकर्षक हैं।

शेयर बाजार और म्‍यूचुअल फंड की ओर कर रहे हैं मूव
वहीं दूसरी ओर निवेशक शेयर बाजार की ओर भी आकर्षि‍ त हो रहे हैं। इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स लगातार डबज डिजिट का रिटर्न दे रहे हैं। जिसकी वजह से फर्स्‍ट टाइम इंवेस्‍टर और एक्‍सपीरियंस इंवेस्‍टर भी स्टॉक और म्यूचुअल फंड की ओर रुख किया है। म्यूचुअल फंड उद्योग तीन साल के लॉक इन के साथ बहुत सारे ईएलएसएस प्रोडक्‍ट्स देता है जो कम लॉक-इन और टैक्‍स बेनिफ‍िट्स का दोहरा लाभ प्रदान करते हैं।

आयकर की धारा 80 के तहत मिलती है छूट  
5 साल की FD पर मिलने वाले ब्याज पर जमाकर्ताओं के हाथ में टैक्स लगता है। इसमें कोई भी इंवेस्‍टर आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80C के तहत छूट प्राप्‍त कर सकता है। फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर 1.5 लाख रुपए तक कर लाभ का दावा करने के लिए, किसी को 5 साल की लॉक-इन पीरियड तक निवेश करते रहना होगा। आप 5 साल की समाप्ति से पहले समय से पहले निकासी नहीं कर सकते।