कोविड19 के अलग-अलग प्रकार से हम सब परेशान हो रखे हैं। अभी एक डेल्टा वेरियंट से उबर रहे थे तभी एक नया वेरियंट ऑमिक्रॉन आ गया है। ऑमिक्रॉन बहुत तेजी से फेल रहा है, दुनिया भर में ऑमिक्रॉन से मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। हमारे देश भारत में भी ऑमिक्रॉन से मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है पर थोड़ी सी राहत हम ले सकते हैं क्योंकि ऑमिक्रॉन से होने वाली मौत के आंकड़ों में कमी आ रही है। भारत में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है जो हमें इस महामारी से लड़ने में सहायक है।

पर हमारे बच्चे जो 15 वर्ष से कम की आयु में है जिन्हें अभी तक टीका नहीं लगा है, हमें अपने बच्चों को इस महामारी से बचा कर रखना है। ऐसा देखा जा रहा है कि ऑमिक्रॉन से प्रभावित होने वाली जनसंख्या बच्चों की भी है, इसलिए हमें परिजन होने के नाते अपने बच्चों को दो गुणा ख्याल रखना होगा। अभी कोचिंग और स्कूल के वापस खुल जाने से ये बच्चों पर ज्यादा खतरा बढ़ गया है। लाॅकडाउन के वापस हट जाने के कारण बाजार में घुमने की पांबदियां खत्म हो गई है जिससे बच्चे बाहर निकल रहे है।

ऐसा देखा गया है कि दक्षिण अफ्रिका में जब ऑमिक्रॉन का मामला सामने आए तब इसका प्रभाव बच्चों पर भी तेजी से हुआ है। पांच साल से कम आयु वाले भी इसकी चपेट में आए हैं। जानकार की राय माने तो उनकी सलाह सयही है कि बच्चों को अभी टीका नहीं लगी है तो अपने बच्चों का ख्याल सबसे ज्यादा रखें। जानकार द्वारा यही सलाह दी जा रही है कि ऑमिक्रॉन का यह नया प्रकार है, इससे होने वाले खतरों को सही से जाना नहीं गया है पर जैसे बिमारी ब़ढ़ रही है उसमे यये देखा गया है कि ऑमिक्रॉन बच्चों पर भी प्रभाव डाल रहा है।

डाॅक्टरस और जानकार की सलाह माने तो सबसे बेस्ट कारगार होगा कि हम अपने बच्चों को ऑमिक्रॉन जैसे वेरियंट से बचाने के लिए बच्चों को भीड़भाड़ वाले जगह में ना भेजे, कोविड प्रोटोकोल की हर नियम को सख्ती से पालन करें, और अगर बच्चे टीकाकरण लगाने की श्रेणी में आते हैं जल्द ही अपने बच्चे का टीकाकरण कराए।