सीएम भगवंत मान बोले- ‘उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा बजट’
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र ने एक बार फिर पंजाब की उम्मीदों को तोड़ा है। उन्होंने कहा कि इस बजट में न तो किसानों के लिए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कोई कानूनी गारंटी है और न ही युवाओं के लिए रोजगार का कोई ठोस रोडमैप।
सीएम मान ने जोर देकर कहा, “पंजाबी मेहनती हैं। केंद्र भले ही हमें नजरअंदाज करे, लेकिन हम अपने दम पर पंजाब की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।”
बजट की 5 बड़ी बातें जिस पर पंजाब सरकार ने उठाए सवाल:
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MSP पर चुप्पी: धान और गेहूं के अलावा अन्य फसलों पर एमएसपी का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं।
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बाढ़ राहत से पंजाब बाहर: पिछले साल आई बाढ़ से हुए नुकसान के लिए कोई विशेष आर्थिक पैकेज नहीं।
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फसल विविधीकरण (Crop Diversification): पराली की समस्या और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए कोई मदद नहीं।
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एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर: मंडियों और खेती के बुनियादी ढांचे के लिए फंड में कोई बढ़ोतरी नहीं।
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युवा और उद्योग: पंजाब के उद्योगों के लिए टैक्स में कोई राहत या बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा नहीं।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा का आरोप: ‘उत्तर भारत के किसानों के साथ भेदभाव’
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बजट को “भेदभावपूर्ण” करार दिया। उन्होंने कहा कि बजट में नारियल, काजू और चंदन जैसी फसलों का जिक्र है, लेकिन उत्तर भारत के उन किसानों के लिए कुछ नहीं है जो देश का पेट भरते हैं। उन्होंने ‘एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ में बढ़ोतरी न होने पर भी सवाल उठाए।
मंत्रियों ने एक सुर में कहा- ‘पंजाब को ठगा गया’
पंजाब कैबिनेट के अन्य मंत्रियों ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा:
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कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां: “देश का अन्न भंडार भरने वाले पंजाब के किसानों के हाथ फिर खाली रह गए हैं।”
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अमन अरोड़ा: “भाजपा पंजाब के साथ सौतेली मां जैसा बर्ताव कर रही है। आजादी से लेकर आज तक पंजाब का योगदान सबसे ज्यादा है, फिर भी कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला।”
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कुलदीप सिंह धालीवाल: “पंजाब का हक छीना जा रहा है, फंड रोके जा रहे हैं। केंद्र को इस अनदेखी का जवाब देना होगा।”
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लालजीत सिंह भुल्लर और लाल चंद कटारुचक: दोनों मंत्रियों ने इसे ‘किसान विरोधी मानसिकता’ वाला बजट बताया।
“खोदा पहाड़, निकली चुहिया” – नील गर्ग
‘आप’ के वरिष्ठ नेता नील गर्ग ने बजट की तुलना पंजाबी कहावत “पट्टिया पहाड़, निकल्या चूहा” से की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट केवल बड़े कॉर्पोरेट घरानों (अंबानी-अडानी) के फायदे के लिए बनाया गया है, जबकि आम आदमी महंगाई की चक्की में पिस रहा है।
