राम मंदिर दान विवाद पर अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर निशाना साधा। SIT जांच, भूमि सौदों और कथित अनियमितताओं पर उठाए सवाल।
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राम जन्मभूमि मंदिर दान गबन मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना महाभारत के पात्र धृतराष्ट्र से करते हुए कहा कि कथित तौर पर मिली सूचनाओं के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़े विवाद ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ भूमि सौदों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। उनके अनुसार, कुछ जमीनों की खरीदारी बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर की गई, जिससे करोड़ों रुपये के लेन-देन पर सवाल उठ रहे हैं।
भूमि खरीद को लेकर लगाए आरोप
AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की खरीद और बिक्री बेहद कम समय के अंतराल में हुई और बाद में उन्हीं जमीनों को ट्रस्ट ने कहीं अधिक कीमत पर खरीदा। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई इंजीनियरों ने कमीशन मांगने की शिकायत की थी और मंदिर परिसर से जुड़े CCTV फुटेज के गायब होने को लेकर भी सवाल खड़े किए।
SIT जांच पर भी उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने विशेष जांच दल (SIT) के गठन को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और SIT के गठन की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच बढ़ते दबाव के बाद जांच की दिशा बदली गई।
also read:- अरविंद केजरीवाल का बड़ा आरोप: अमित शाह राम मंदिर का जिक्र…
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए व्यापक और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि दोषी व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई हो सके।
मामले की जांच जारी
राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन को लेकर 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर मामले की जांच शुरू की गई। जांच को और व्यापक बनाने के लिए SIT को अतिरिक्त 15 दिनों का समय दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
ट्रस्ट ने जताया जांच में सहयोग का भरोसा
राम मंदिर ट्रस्ट ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह निष्पक्ष जांच का समर्थन करता है और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
इस बीच, पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने विवाद के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस ने चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।
राजनीतिक माहौल हुआ गरम
राम मंदिर दान विवाद को लेकर देश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि जांच एजेंसियों को बिना राजनीतिक दबाव के अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
फिलहाल, पूरे मामले की निगाहें SIT जांच पर टिकी हैं, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



