सोवियत संघ के कजाकिस्तान, किर्गिस्तान आदि कई देशों में भी हजारों की संख्या में भारत के छात्र MBBS की पढ़ाई करने के लिए गए हैं। यू्क्रेन और रुस में युद्ध छिड़ जाने के बाद दूसरे देशों में पढ़ने वाले बच्चों के परिवार के लोग भी चिंतित हैं। यूक्रेन के अलावा सोवियत संघ के अन्य देशों में भी MBBS की पढ़ाई करने के लिए जा रहे हैं। विकास खंड मूंढापांडे के ग्राम मढैयों की मिलक निवासी डा. शाने आलम का छोटा भाई दानिश हसन किर्गिस्तान के एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट में MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं।

 

रूस और यूक्रेन में युद्ध छिड़ने के बाद से दानिश का परिवार का भी चिंता में है। इसलिए रोजाना फोन करके हालचाल ले रहे हैं। डा. शाने आलम का कहना है कि शुक्रवार को ही उनकी भाई से बात हुई थी। वहां शांति है। लेकिन, चिंता तो फिर भी बनी रहती है। कुंदरकी विकास खंड के अल्लापुर भीकन गांव के रहने वाले डा. नासिर हुसैन निजी विश्वविद्यालय में नौकरी करते हैं। उनकी बहन कजाकिस्तान की मेडिकल यूनिवर्सिटी में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें भी बहन की चिंता बनी रहती है। हालांकि, वहां कोई दिक्कत नहीं है। डा. नासिर ने बताया कि उनकी बहन से दिन में कई बार बात हो जाती है। वहां के हालात सामान्य हैं। इसी तरह जिले के और भी कई छात्र और छात्राएं सोवियत संघ के अन्य विश्वविद्यालयों में MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके परिवार के लोगों को भी बच्चों की चिंता बनी हुई है।