संजय दत्त के टीवी शो में देश में शांति को लेकर दिए बयान पर सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ी। विवाद के बाद अभिनेता ने अपने बयान पर सफाई दी।
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त इन दिनों अपने एक टीवी शो में दिए बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। शेखर सुमन के शो ‘शेखर टुनाइट’ के गांधी जयंती विशेष एपिसोड में अभिनेता ने देश में शांति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। इसके बाद उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। बढ़ती चर्चा के बीच संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर सफाई भी दी और कहा कि उनकी बातों को मूल संदर्भ से अलग समझा गया।
संजय दत्त ने देश में शांति को लेकर क्या कहा?
कार्यक्रम के दौरान संजय दत्त ने कहा कि भारत के लोग बेहद अच्छे, दिलदार और मेहमाननवाज हैं और देश में शांति का माहौल होना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती।
अभिनेता ने यह भी इच्छा जताई कि देश में वह पुराना शांतिपूर्ण माहौल दोबारा लौटे। उनके इस संजय दत्त बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई और कई यूजर्स ने उनके शब्दों को राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।
पांच मिनट के लिए बने प्रधानमंत्री
शो में संजय दत्त को एक दिलचस्प टास्क दिया गया। उनसे कहा गया कि वह कुछ मिनटों के लिए खुद को देश का प्रधानमंत्री मानकर जनता को संबोधित करें।
इसके बाद अभिनेता ने अपने मशहूर किरदार ‘मुन्नाभाई’ की शैली में मजाकिया और व्यंग्यात्मक भाषण दिया। उन्होंने शुरुआत भी अपने खास अंदाज में की और कहा कि देश में कुछ तो चल रहा है।
संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बनेंगे तो देश छोड़कर विदेश में जश्न मनाने नहीं जाएंगे, बल्कि देश में ही रहेंगे। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री और आम जनता के बीच सीधा संपर्क होना जरूरी है।
भाईचारे को बताया सरकार की प्राथमिकता
संजय दत्त ने अपने काल्पनिक प्रधानमंत्री भाषण में कहा कि उनकी सरकार का सबसे ज्यादा जोर भाईचारे पर रहेगा। उन्होंने लोगों को तनाव न लेने और एक-दूसरे के साथ मिलकर रहने का संदेश दिया।
अभिनेता ने यह बात भी कही कि देश के लोगों से सीधा जुड़ाव जरूरी है और सरकार को जनता के बीच रहकर काम करना चाहिए। उनके इस संजय दत्त बयान को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई।
गांधी जी के चौथे बंदर का किया जिक्र
अभिनेता ने महात्मा गांधी के तीन बंदरों के प्रसिद्ध संदेश का उदाहरण देते हुए एक ‘चौथे बंदर’ की बात कही। उनके मुताबिक, ऐसा बंदर होना चाहिए जो गलत चीजों को देखकर उसे सुधारने की कोशिश करे।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लोग सिर्फ आंख, कान और मुंह बंद करके बैठे रहेंगे तो गलत चीजों को ठीक कौन करेगा। उनके अनुसार, गलत दिखाई देने पर उसे सुधारने की कोशिश भी जरूरी है।
नेताओं की तस्वीरों पर भी की टिप्पणी
संजय दत्त ने नेताओं की तस्वीरों को लेकर भी व्यंग्य किया। उन्होंने कहा कि जहां किसी नेता की तस्वीर लगाने की इच्छा हो, वहां महात्मा गांधी की तस्वीर लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी नेता की तस्वीर से ज्यादा उसके विचार महत्वपूर्ण होते हैं। अभिनेता ने कहा कि देश को सबसे पहले ‘फ्रेम’ में रखा जाना चाहिए और दुनिया को भी इसी नजरिए से देखने की जरूरत है।
ट्रंप को गांधीगिरी सिखाने की बात
अपने मजाकिया भाषण में संजय दत्त ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी जिक्र किया। उन्होंने उन्हें मजाकिया अंदाज में ‘ट्रंप मामू’ कहा और कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री होते तो सबसे पहले उनसे मिलने जाते।
अभिनेता ने कहा कि वह ट्रंप को समझाते कि दुनिया में तनाव और हमले बढ़ाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने अपने मशहूर ‘गांधीगिरी’ अंदाज में प्यार और शांति को आगे बढ़ाने की बात कही।
संजय दत्त ने कहा कि दुनिया में मिसाइलों की कमी नहीं है, बल्कि अब प्यार को आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने मजाक में यह भी कहा कि किसी को मिसाइल भेजने से पहले गुलदस्ता भेजना चाहिए और धमकी देने के बजाय सामने वाले को चाय पर बुलाकर बातचीत करनी चाहिए।
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
शो प्रसारित होने के बाद संजय दत्त बयान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया। कुछ यूजर्स ने उनके भाषण को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्य माना, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि अभिनेता आखिर किस तरह की शांति की बात कर रहे हैं।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके विदेश दौरों, नेताओं की तस्वीरों और भाईचारे से जुड़ी टिप्पणियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित तंज से जोड़कर देखा। वहीं कुछ लोगों ने अभिनेता के बयान की तारीफ भी की।
विवाद बढ़ने के बाद संजय दत्त ने दी सफाई
सोशल मीडिया पर बढ़ती चर्चा के बीच संजय दत्त ने फेसबुक पोस्ट के जरिए अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या किसी का अपमान करना नहीं था।
अभिनेता ने बताया कि उनकी टिप्पणियां एक स्क्रिप्टेड बातचीत का हिस्सा थीं, जिसका मकसद हल्का-फुल्का और हास्यपूर्ण संवाद करना था। उन्होंने कहा कि इस पूरे संवाद की शैली उनके ‘मुन्नाभाई’ जैसे किरदारों में दिखाई गई व्यंग्यात्मक सोच से जुड़ी थी।
संजय दत्त ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संदेश प्रेम, एकता और सद्भावना से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से उनकी बातों को मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया।
इस सफाई के बाद संजय दत्त बयान को लेकर चल रही बहस में एक नया मोड़ आया है। जहां कुछ लोग उनके बयान को राजनीतिक टिप्पणी मान रहे थे, वहीं अभिनेता ने इसे फिल्मी अंदाज में की गई स्क्रिप्टेड और हास्यपूर्ण बातचीत बताया है।
‘मुन्नाभाई’ की गांधीगिरी फिर चर्चा में
पूरे विवाद में संजय दत्त का ‘मुन्नाभाई’ वाला अंदाज सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। फिल्मी किरदार के जरिए लोकप्रिय हुई ‘गांधीगिरी’ की शैली को उन्होंने अपने भाषण में दोबारा इस्तेमाल किया और दुनिया में शांति, प्यार और बातचीत का संदेश देने की कोशिश की।
फिलहाल संजय दत्त बयान को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है और अभिनेता की सफाई के बाद भी इस मुद्दे पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है।
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