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तरंग शक्ति 2026 का समापन: वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने स्वदेशी तेजस में भरी करियर की आखिरी उड़ान

तरंग शक्ति 2026 के समापन पर वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने स्वदेशी तेजस में करियर की आखिरी उड़ान भरी। जानें युद्धाभ्यास और इसमें शामिल देशों की पूरी जानकारी।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में अपने करियर की अंतिम उड़ान भरी। सोमवार को हुई इस उड़ान के साथ ही 26 सितंबर से शुरू हुए बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास तरंग शक्ति-2026 का समापन हो गया। इस अवसर पर सुखोई-30, राफेल, एफ-16 और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमान भी आसमान में एक साथ नजर आए। वहीं, भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण टीम ने अलग-अलग फॉर्मेशन बनाकर अपनी उड़ान क्षमताओं का प्रदर्शन किया।

स्वदेशी तेजस में एपी सिंह की आखिरी उड़ान

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की तेजस में अंतिम उड़ान उनके सैन्य विमानन करियर का एक महत्वपूर्ण अवसर रही। भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा करते हुए उनके उड़ान के प्रति जुनून और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण को याद किया।

तरंग शक्ति 2026 के समापन के मौके पर स्वदेशी लड़ाकू विमान में वायुसेना प्रमुख की उड़ान ने भारत की रक्षा विमानन क्षमताओं को भी चर्चा में ला दिया। तेजस भारत में विकसित हल्का लड़ाकू विमान है, जो देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक और विमान निर्माण क्षमता का प्रमुख उदाहरण है।

वायुसेना की ओर से साझा संदेश में कहा गया कि उनके करियर का यह ऐतिहासिक पल वर्षों के समर्पण और देश की सेवा के संकल्प को दर्शाता है। भले ही आसमान में उड़ान का यह अध्याय समाप्त हो रहा है, लेकिन राष्ट्रसेवा का मिशन जारी रहेगा।

आसमान में एक साथ उड़े सुखोई-30, राफेल और एफ-16

जोधपुर एयरबेस पर आयोजित कार्यक्रम में कई प्रकार के लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। वायुसेना प्रमुख के साथ सुखोई-30, राफेल, एफ-16 और मिराज-2000 विमानों ने भी उड़ान भरी।

भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने अलग-अलग फॉर्मेशन बनाकर हवाई प्रदर्शन किया। विमानों की संयुक्त उड़ान ने कार्यक्रम को खास बना दिया और विभिन्न लड़ाकू विमानों की परिचालन क्षमताओं को सामने रखा।

तरंग शक्ति 2026 के दौरान अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग और समन्वय पर भी ध्यान दिया गया। ऐसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों में भाग लेने वाली सेनाओं को एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को समझने और संयुक्त अभियानों से जुड़ी क्षमताओं का अभ्यास करने का अवसर मिलता है।

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भारत समेत आठ देशों के वायुसैनिक हुए शामिल

26 सितंबर से शुरू हुए तरंग शक्ति-2026 में भारत के अलावा अमेरिका, ग्रीस, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश के वायुसैनिकों ने भाग लिया।

इस अभ्यास का उद्देश्य भाग लेने वाले देशों के बीच आपसी तालमेल को बढ़ाना और संयुक्त हवाई अभियानों के लिए सहयोग को मजबूत करना था। विभिन्न देशों के वायुसैनिकों की भागीदारी ने इसे बहुराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बनाया।

जोधपुर में आयोजित समापन कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों की संयुक्त उड़ान ने इस अभ्यास के अंतिम चरण को खास पहचान दी। इसमें स्वदेशी तेजस की मौजूदगी भारत की घरेलू रक्षा विमानन क्षमता की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है।

31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके बाद आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख बनाए जाने की जानकारी दी गई है।

सेवानिवृत्ति से पहले तेजस में उनकी अंतिम उड़ान उनके लंबे सैन्य करियर का यादगार पड़ाव रही। वायुसेना के संदेश में उनके पेशेवर जीवन को उड़ान के प्रति जुनून और राष्ट्र के प्रति समर्पण से जुड़ा बताया गया।

स्वदेशी तेजस क्यों है महत्वपूर्ण?

तेजस भारत में विकसित हल्का लड़ाकू विमान है। इसका विकास देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण और विमानन तकनीक को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। भारतीय वायुसेना में इसकी भूमिका स्वदेशी लड़ाकू विमानों के संचालन और देश की रक्षा क्षमताओं से जुड़ी है।

तरंग शक्ति 2026 के समापन पर वायुसेना प्रमुख की तेजस में अंतिम उड़ान ने स्वदेशी विमान को भी प्रमुखता दी। यह अवसर एक ओर ए.पी. सिंह के सैन्य करियर के महत्वपूर्ण अध्याय का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर बहुराष्ट्रीय अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग को भी सामने लाया।

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