सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी एन श्रीनिवासन की बाइक 25 साल पहले चोरी हो गई थी। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें अपनी प्यारी मोटरसाइकिल फिर से कभी देखने को मिलेगी। उन्हें अपनी इस बाइक से बहुत प्यार था। यह बात बेटे के पता थी और वह लगातार पिता की बाइक वापस पाने का प्रयास करता रहा। आखिर 25 साल बाद उसने पिता की मोटरसाइकल खोज निकाली।

कर्नाटक के बेंगलुरु में रहने वाले 75 वर्षीय श्रीनिवासन ने रॉयल एनफील्ड बुलेट 1971 में खरीदी थी। उन्होंने अपने दोस्त को यह बाइक 1996 में दी थी, उसके बाद यह चोरी हो गई थी। वह बहुत दुखी हुए थे, क्योंकि उन्हें अपनी इस मोटरसाइकल से बहुत प्यार था। उनके सॉफ्टवेयर इंजिनियर बेटे के पास 1972 में खींची गई मोटरसाइकल की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर थी।

हसन शहर में तैनाती के दौरान चोरी गई बाइक

2006 के मध्य में 38 वर्षीय अरुण श्रीनिवासन ने अपने पिता की खोई हुई मोटरसाइकल खोजने की ठानी। उन्होंने बताया कि उनके पिता सिंडिकेट बैंक में किसानों के लिए ऋण से निपटाने वाले एक कृषि अधिकारी के रूप में काम करते थे।जब वह हसन शहर में तैनात थे। उन्होंने मोटरसाइकल खरीदी थी। उनके पास एक ब्लैक एंड बॉइट बाइक की तस्वीर थी और पंजीकरण प्लेट MYH 1731 पता था

श्रीनिवासन अपने पिता के दोस्त पास मणिपाल पहुंचे। यहां से उन्हें पता चला कि बाइक दोस्त के पास से 1995 में चोरी हो गई थी। दिन महीनों में और महीने सालों में बदलते गए पर अरुण ने अपनी खोज जारी रखी। उन्होंने कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में पुराने गैरेज में पूछताछ की। उन्होंने विभिन्न आरटीओ में अपने पिता के पुराने दोस्तों और एजेंटों से संपर्क किया, और 2021 तक उनके मेहनत बेकार रही। उसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया का भी सहारा लिया।

डिजिटलीकरण का मिला फायदा

देश भर में परिवहन विभाग का पूर्ण डिजिटलीकरण और सरकार का परिवहन सेवा पोर्टल सॉफ्टवेयर पेशेवर के लिए आशा की किरण बनकर आया है। 2021 की शुरुआत में, मैंने अपने पिता की मोटरसाइकिल के पंजीकरण विवरण के साथ खोजना शुरू किया। जब मैंने रॉयल एनफील्ड बुलेट के रजिस्ट्रेशन पर एक बीमा पॉलिसी देखी तो खुशी का ठिकाना न रहा।

एक किसान के पास मिली बाइक

परिवहन कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद अरुण फरवरी 2021 में मैसूर के टी नरसीपुरा के एक गांव के एक किसान का पता लगाने में कामयाब रहे। अरुण ने किसान से संपर्क किया। किसान ने उन्हें बताया कि 2015 में एक स्थानीय ऑटोमोबाइल डीलर से उसने 1971-मॉडल की यह बाइक खरीदी थी। ऑटोमोबाइल डीलर ने इसे हसन पुलिस की ओर से की गई नीलामी में खरीदा था।

दादा की याद में किसान ने खरीदी रॉयल एनफील्ड

किसान ने बताया कि उसके दादा रॉयल एनफील्ड बुलेट के मालिक थे। उनकी याद में उसने यह मोटरसाइकिल खरीदी, मॉडीफाई करवाई और उसका यूज शुरू कर दिया। उसने कहा कि मोटरसाइकल से उसका भावात्मक जुड़ाव है। अरुण को उसने मोटरसाइकल देने से इनकार कर दिया।

मोटरसाइकल से लिपटकर रोए पिता

हालांकि बीते दिनों अरुण को उस किसान का कॉल आया। उसने कहा कि वह मोटरसाइकिल बेचने को तैयार है। वह अपनी बेटी यशा और दोस्त कार्तिक माकम के साथ टी नरसीपुरा पहुंचे। यहां मोटरसाइकल ठीक करवाने के बाद वह इसे वापस बेंगलुरु ले गए। अरुण और यशा ने जब श्रीनिवासन को बाइक सौंपी, तो वह अपने आंसू नहीं रोक पाए। वह अपनी मोटरसाइकल और बेटे से लिपटकर खूब रोए।