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महिला आरक्षण विधेयक पर राजनीति से ऊपर उठें दल: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा में भरी हुंकार

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने महिला आरक्षण विधेयक पर एकजुटता की अपील की। जानें कैसे 33% आरक्षण और जेंडर बजटिंग से बदलेगी महिलाओं की किस्मत।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा आह्वान किया। विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान – लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे महिला आरक्षण विधेयक पर अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट हों। उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33% आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने की वकालत की।

नीति-निर्धारण में महिलाओं की भूमिका है अनिवार्य

अपने संबोधन के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह विधेयक केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है कि देश की नीतियों को तय करने में महिलाओं की निर्णायक भूमिका हो। उन्होंने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ दल इस मुद्दे पर भ्रम पैदा कर रहे हैं और अतीत में उन्होंने ही इस महत्वपूर्ण कानून को रोकने का काम किया था।

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उत्तराखंड में सशक्त होती ‘नारी शक्ति’

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि उत्तराखंड में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं:

लखपति दीदी योजना: राज्य में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं अब ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

सरकारी नौकरियों में आरक्षण: उत्तराखंड सरकार ने पहले ही सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30% क्षैतिज आरक्षण लागू किया है।

बजट का प्रावधान: इस वर्ष जेंडर बजटिंग के तहत लगभग 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

केंद्र के ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का समर्थन

पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की सराहना की। उन्होंने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई से लेकर सावित्रीबाई फुले तक की विरासत को आज की पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन (Delimitation) जैसी प्रक्रियाएं किसी भी राज्य को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी और केंद्र सरकार ने इस पर पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी है।

विपक्षी दलों का रुख और चुनौतियां

जहाँ एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एकजुटता की अपील की, वहीं नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित विपक्षी नेताओं ने विधेयक का समर्थन तो किया, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई। विपक्ष की मांग है कि इसे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ही लागू किया जाए। हालांकि, पुष्कर सिंह धामी ने दृढ़ता से कहा कि समान नागरिक संहिता (UCC) और महिला आरक्षण जैसे कदम महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

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