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शिवलिंग पूजा नियम: जल चढ़ाते समय किस दिशा में होना चाहिए मुंह, जानें सही विधि और शास्त्रों के अनुसार उपाय

शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम, सही दिशा और पूजा विधि जानें। शास्त्रों के अनुसार शिव पूजा का सही तरीका और मंत्र जाप के लाभ।

शिवलिंग पूजा नियम हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम को लेकर शास्त्रों में विस्तृत जानकारी दी गई है। सोमवार और सावन माह में शिव पूजा का विशेष महत्व होता है, ऐसे में सही विधि से की गई पूजा से अधिक शुभ फल प्राप्त होते हैं।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा (Shivling Puja Niyam)

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पूजा नियम में बताया गया है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय भक्त का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। यह दिशा अत्यंत शुभ मानी जाती है और इससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि शिवलिंग पूजा नियम के अनुसार गलत दिशा में जल चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हमेशा सही दिशा का पालन करना आवश्यक है।

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जल चढ़ाने में किन बर्तनों का करें उपयोग

शिवलिंग पूजा नियम के अनुसार जल अर्पित करने के लिए चांदी का पात्र सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यदि यह उपलब्ध न हो तो तांबे या कांसे के लोटे का उपयोग किया जा सकता है।

शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि पूजा नियम के अनुसार स्टील या लोहे के पात्र से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। तांबे का पात्र सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन इसमें दूध नहीं चढ़ाना चाहिए।

शिवलिंग पूजा की सही विधि

शिवलिंग पूजा नियम के अनुसार सबसे पहले गणेश जी को जल अर्पित करें, फिर कार्तिकेय जी को जल चढ़ाएं। इसके बाद माता पार्वती और सर्प देवता को जल अर्पित करना चाहिए। अंत में पूरे शिवलिंग पर श्रद्धा भाव से गोलाकार जल अर्पित करें।

यह विधि पूजा नियम के अनुसार अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है और इससे भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

शिवलिंग जल चढ़ाते समय मंत्र

पूजा नियम में मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है। जल चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसके जाप से मन को शांति मिलती है।

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