माघ गुप्त नवरात्रि 2026: आम नवरात्रि से अलग क्यों है और क्यों की जाती है 10 महाविद्याओं की साधना
माघ गुप्त नवरात्रि 2026: आम नवरात्रि से अलग, जानें 10 महाविद्याओं की साधना, मुहूर्त और महत्व।
माघ माह की गुप्त नवरात्रि आज से शुरू हो चुकी है और यह 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस दौरान विशेष रूप से देवी मां के दस महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। गुप्त नवरात्रि अन्य नवरात्रियों से बिल्कुल अलग मानी जाती है, क्योंकि इसमें दिखावा नहीं होता और केवल साधना, मंत्र-जप और ध्यान पर जोर दिया जाता है।
गुप्त नवरात्रि और आम नवरात्रि में अंतर
हिंदू धर्म में साल में चार नवरात्रियों का पर्व होता है – चैत्र, शारदीय, आषाढ़ और माघ।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि: धूमधाम से मनाई जाती हैं और आदिशक्ति के नौ रूपों का पूजन किया जाता है।
आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि: साधकों द्वारा गुप्त साधना के रूप में मनाई जाती हैं। इनमें बाहरी दिखावे का कोई महत्व नहीं होता। केवल मंत्रों का जाप, ध्यान और आत्मिक शुद्धि पर ध्यान दिया जाता है।
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10 महाविद्याओं की साधना
माघ गुप्त नवरात्रि में मां के दस महाविद्याओं का पूजन किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुरसुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्तिका
- मां त्रिपुर भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
ये दस महाविद्याएं आदिशक्ति मां पार्वती के दस अलग-अलग रूप हैं। हर महाविद्या का अपना विशेष महत्व और शक्ति होती है। इनकी साधना से जीवन के हर क्षेत्र में लाभ, आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
गुप्त नवरात्रि की साधना का महत्व
नवरात्रि में साधक संयमित जीवन, उपवास और धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। इससे मन और आत्मा की शुद्धि होती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है। दस महाविद्याओं की साधना से भय, शत्रु बाधा, ग्रह दोष, धन की समस्याओं से मुक्ति मिलती है और आत्मबल बढ़ता है।
यह पर्व उन लोगों के लिए विशेष है जो ध्यान, साधना और मंत्रों के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक विकास चाहते हैं।
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