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भीष्म अष्टमी 2026 कब है और क्यों मनाई जाती है? जानें महत्व और पूजा विधि

भीष्म अष्टमी 2026 कब है? जानें माघ माह की अष्टमी तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पितरों के तर्पण का महत्व।

भीष्म अष्टमी 2026: हिंदू धर्म में माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे भीष्म अष्टमी कहा जाता है और यह महाभारत के पितामह भीष्म की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है। इस दिन पितरों का तर्पण करने की परंपरा होती है और इसे पितृ दोष से मुक्ति और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का उत्तम अवसर माना जाता है।

भीष्म अष्टमी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी 2026, रात 11:10 बजे से शुरू होकर 26 जनवरी 2026, रात 9:11 बजे तक रहेगी। इस वर्ष भीष्म अष्टमी का व्रत 26 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।

भीष्म अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त

पूजा मुहूर्त: सुबह 11:29 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक

इस समय पितरों का तर्पण और पूजा करना सबसे फलदायी माना जाता है।

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भीष्म अष्टमी का महत्व

भीष्म अष्टमी पितामह भीष्म की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है। महाभारत के युद्ध के दौरान, अर्जुन ने 10वें दिन भीष्म को बाणों की शय्या पर लिटा दिया। भीष्म पितामह ने उत्तरायण सूर्य का इंतजार किया और तभी अपने प्राण त्यागे। तभी से इस दिन को उनके सम्मान में मनाया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितरों का तर्पण करने से:

पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है

पितृ दोष से मुक्ति मिलती है

व्यक्ति को पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है

श्राद्ध कर्म और दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है

भीष्म अष्टमी 2026 पूजा विधि

सुबह उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।

पवित्र स्थान पर पीले वस्त्र पहनकर पितरों का तर्पण करें।

उनके नाम पर दान और श्राद्ध कर्म करें।

पूजा के अंत में भगवान का ध्यान और आरती करें।

इस दिन किये गए कर्म से आत्मिक शांति और पितृ आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

भीष्म अष्टमी न केवल पितृ तर्पण का अवसर है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि और धर्म पालन का पावन अवसर भी है।

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