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माघ पूर्णिमा 2026: तिथि, मुहूर्त, स्नान-दान और पूजा विधि के साथ संपूर्ण गाइड

माघ पूर्णिमा 2026 तिथि, मुहूर्त, स्नान-दान और पूजा विधि। जानें इस पवित्र दिन के महत्व, शुभ समय और दान सामग्री।

माघ पूर्णिमा 2026: माघ पूर्णिमा हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे ‘बत्तीस पूर्णिमा’ या ‘बत्तिसी पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्णिमा माघ महीने के अनुसार आती है और इस दिन दान, पूजा और स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। माघ पूर्णिमा पर किया गया दान और स्नान भक्तों के जीवन में सुख, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खोलता है।

माघ पूर्णिमा 2026 की तिथि और समय

वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी से 2 फरवरी तक रहेगी। पंचांग अनुसार माघ पूर्णिमा का व्रत 1 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन चंद्र उदय का समय सांय 05:26 बजे है।

माघ पूर्णिमा 2026 स्नान-दान मुहूर्त

माघ पूर्णिमा के दिन पूरे दिन स्नान और दान के लिए शुभ माना जाता है। विशेष शुभ मुहूर्त सुबह 05:24 से 06:17 बजे तक रहेगा। इस समय स्नान-दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

माघ पूर्णिमा 2026 पूजा विधि

माघ पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और सत्यनारायण की पूजा की जाती है। इस दिन की पूजा में निम्नलिखित चीज़ों का प्रयोग किया जाता है:

धूप-दीप और तुलसी का पूजन

पान, सुपारी, रोली-मोली, तिल और दूर्वा

भगवान को पंचामृत और प्रसाद के रूप में पंजीरी भेंट करना

सत्यनारायण कथा का पाठ करना भी इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

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माघ पूर्णिमा पर दान का महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन दान करने का विशेष महत्व है। दान से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान में तिल, वस्त्र, भोजन, गुड़, कपास, घी, लड्डू, फल और अन्न देना लाभकारी माना जाता है। ‘मत्स्य पुराण’ के अनुसार इस दिन गरीबों और ब्राह्मणों को दिया गया दान मोक्ष और स्वर्ग की प्राप्ति का मार्ग खोलता है।

माघ पूर्णिमा स्नान का महत्व

माघ पूर्णिमा के दिन नदियों और संगम में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक किए गए तीर्थ स्नान से सूर्य और चंद्रमा के दोष समाप्त होते हैं। विशेष रूप से प्रयाग नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी होता है। इस दिन स्नान करते समय गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ फल देता है।

माघ पूर्णिमा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसे समाज में दान, सेवा और मानवता की भावना फैलाने का उपयुक्त अवसर भी माना जाता है। इस दिन का व्रत, पूजा और स्नान जीवन में समृद्धि, सौभाग्य और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

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