आबकारी नीति मामला: अरविंद केजरीवाल की जीत संवैधानिक नैतिकता की पुष्टि, सत्य की हुई विजय – कुलतार सिंह संधवां
चंडीगढ़, 27 फरवरी 2026: पंजाब विधान सभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने आबकारी नीति मामले में न्यायालय के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र और न्यायपालिका की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामलों का निरस्त होना यह सिद्ध करता है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, पराजित नहीं।
‘कानून के शासन’ की हुई पुनर्पुष्टि
स्पीकर संधवां ने जोर देकर कहा कि न्यायालय का यह फैसला संवैधानिक नैतिकता और कानून के शासन की सर्वोच्चता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब जांच एजेंसियां बिना किसी ठोस साक्ष्य के एक निर्वाचित मुख्यमंत्री पर आरोप लगाती हैं, तो उससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि धूमिल होती है।
“मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों के विरुद्ध मामला समाप्त होना यह दर्शाता है कि राजनीतिक रूप से लगाए गए आरोप न्यायिक जांच की कसौटी पर रत्ती भर भी नहीं टिक सके।” – कुलतार सिंह संधवां
न्यायालय के निर्णय के मुख्य बिंदु:
सभी 23 आरोपी बरी: न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में मनीष सिसोदिया और अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ मामला रद्द किया।
जांच एजेंसियों पर सवाल: कोर्ट ने जांच अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का निर्देश देकर जवाबदेही तय की है।
सत्य की विजय: केजरीवाल को केवल कानूनी राहत ही नहीं मिली, बल्कि वे नैतिक रूप से भी पूरी तरह ‘सत्य सिद्ध’ होकर उभरे हैं।
अरविंद केजरीवाल: एक दृढ़ और दूरदर्शी नेता
कुलतार सिंह संधवां ने अरविंद केजरीवाल के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें आधुनिक भारत का एक दूरदर्शी और ईमानदार नेता बताया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने सदैव पारदर्शिता और जनसेवा को प्राथमिकता दी है।
उन्होंने आगे कहा:
- बदले की राजनीति का अंत: यह निर्णय स्पष्ट करता है कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया गया था।
- संस्थागत शुचिता: जांच एजेंसियों की विफलता यह बताती है कि बिना साक्ष्य के कार्रवाई करना लोकतंत्र के लिए घातक है।
- जनता का विश्वास: अरविंद केजरीवाल का संघर्षपूर्ण सफर उनकी नैतिकता और जनता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।



