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हरियाणा के पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच मुकाबला, जानें क्या है सरकार की योजना

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला! शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच होगी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता। पढ़ें पूरी खबर।

हरियाणा सरकार प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में, स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके तहत अब प्रदेश के पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच राज्य स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करना और शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सरकार का जोर

हरियाणा सरकार का मानना है कि सरकारी विद्यालयों में केवल बुनियादी ढांचा ही नहीं, बल्कि बौद्धिक विकास भी उच्च स्तर का होना चाहिए। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच होने वाली यह प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के उपायुक्तों और मंडल आयुक्तों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि इस आयोजन को जमीनी स्तर पर सफल बनाया जा सके।

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प्रतिस्पर्धा से सुदृढ़ होगा भविष्य

इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के माध्यम से पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के छात्र अपनी शैक्षणिक और सह-पाठ्यचर्या संबंधी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। सरकार का मानना है कि जब राज्य के दो सर्वश्रेष्ठ स्कूल मॉडल आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे, तो इससे शिक्षण की गुणवत्ता में और अधिक सुधार होगा। यह पहल न केवल छात्रों के लिए बल्कि शिक्षकों के लिए भी अपनी शिक्षण पद्धतियों को और अधिक ‘परिणाममुखी’ बनाने का एक अवसर होगी।

“हमारा लक्ष्य हरियाणा के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी बेहतर बनाना है। पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच यह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।”

प्रशासनिक तैयारियां तेज

विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला स्तर पर इन प्रतियोगिताओं की निगरानी स्वयं उपायुक्त करेंगे। पीएम श्री विद्यालयों और मॉडल संस्कृति स्कूलों के बीच इस प्रतियोगिता की रूपरेखा इस तरह तैयार की गई है कि इसमें विज्ञान, गणित, कला और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों को शामिल किया जाए। इससे राज्य के सरकारी स्कूलों में ‘शिक्षा की गुणवत्ता’ को सुदृढ़ करने के विजन को बल मिलेगा।

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