आतिशी ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर साधा निशाना। महिलाओं के ₹2500 भत्ते में देरी और AAP सांसदों के भाजपा में विलय को बताया असंवैधानिक। पढ़ें पूरी खबर।
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने मंगलवार (28 अप्रैल 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रेखा गुप्ता सरकार पर तीखा हमला बोला। आतिशी ने महिलाओं को मिलने वाले ₹2,500 के मासिक भत्ते में देरी और आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सांसदों के इस विलय को पूरी तरह से “असंवैधानिक” करार दिया है।
चुनावी वादों पर उठाए सवाल
आतिशी ने याद दिलाया कि पिछले साल जनवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने वादा किया था कि राजधानी की महिलाओं को 8 मार्च से उनके बैंक खातों में ₹2,500 मिलने लगेंगे। उन्होंने कहा, “8 मार्च 2025 बीत गया और अब 8 मार्च 2026 भी निकल चुका है, लेकिन दिल्ली की महिलाओं के खातों में अभी तक एक रुपया भी नहीं पहुंचा है।”
महिलाओं के साथ धोखे का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने केवल इस वादे के दम पर महिलाओं के वोट हासिल किए थे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने मोबाइल नंबर बैंक खातों से जोड़ने के लिए कहा गया था और आश्वासन दिया गया था कि राशि ट्रांसफर होने पर उन्हें एसएमएस मिलेगा। आतिशी के अनुसार, महिलाएं आज भी इस स्पष्टीकरण का इंतजार कर रही हैं कि यह वित्तीय सहायता आखिर कब मिलेगी।
also read:- अरविंद केजरीवाल ने राजघाट पर महात्मा गांधी को किया नमन,…
सार्वजनिक सेवाओं में असुविधा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतिशी ने यह भी दावा किया कि दिल्ली में महिलाओं को सार्वजनिक सेवाओं का लाभ उठाने में भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा:
बस यात्रा: जो महिलाएं पहले आसानी से डीटीसी बसों में सफर करती थीं, उन्हें अब “पिंक कार्ड” के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवा: मुफ्त दवाओं, इलाज और टेस्ट की सुविधा अब पहले जैसी सुलभ नहीं रही है।
सांसदों का विलय ‘असंवैधानिक’
सांसदों के भाजपा में शामिल होने के मुद्दे पर आतिशी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा सभापति द्वारा इस विलय को स्वीकार करना संवैधानिक प्रावधानों और दलबदल विरोधी कानून के खिलाफ है। आतिशी ने तर्क दिया कि संविधान के अनुसार, विलय तभी मान्य होता है जब मूल राजनीतिक दल का विलय हो और उसे कम से कम दो-तिहाई विधायी दल का समर्थन प्राप्त हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है जो मूल पार्टी के विलय के बिना केवल दो-तिहाई सांसदों को दूसरी पार्टी में शामिल होने की अनुमति देता हो। आम आदमी पार्टी ने संकल्प लिया है कि वे इस असंवैधानिक कदम के खिलाफ कानूनी और संवैधानिक लड़ाई जारी रखेंगे।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



