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टिहरी दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित यात्रा, कोटीकॉलोनी में भव्य जनसभा की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित टिहरी दौरे में 1000 मेगावाट पीएसपी परियोजना के लोकार्पण और मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखे जाने की संभावना है।

उत्तराखंड के टिहरी जिले में एक बड़े विकास कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तेजी देखी जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि पीएम नरेंद्र मोदी  इस माह के अंत या जून के पहले सप्ताह में टिहरी का दौरा कर सकते हैं।

इस दौरे के दौरान टिहरी झील किनारे स्थित कोटी कॉलोनी (कोटीकोटली) क्षेत्र में एक विशाल जनसभा आयोजित किए जाने की तैयारी चल रही है, जिसे लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं की समीक्षा भी शुरू कर दी गई है।

1000 मेगावाट पीएसपी परियोजना का हो सकता है लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  इस दौरे में देश की पहली वेरिएबल स्पीड 1000 मेगावाट पंप स्टोरेज परियोजना (PSP) को राष्ट्र को समर्पित कर सकते हैं। यह परियोजना टिहरी जलविद्युत विकास क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है।

यह परियोजना Tehri Dam से जुड़ी जलविद्युत प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाएगी। इससे बिजली उत्पादन को मांग के अनुसार नियंत्रित करने की क्षमता विकसित होगी, जिससे ऊर्जा प्रबंधन अधिक कुशल होगा।

टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला की भी संभावना

सूत्रों के अनुसार,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  इस दौरे में टिहरी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला भी रख सकते हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई अहम प्रोजेक्ट्स की घोषणा भी संभव है।

इन योजनाओं में बांध प्रभावितों के पुनर्वास, रायल्टी विवाद, रिंग रोड परियोजना और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

THDC की बड़ी परियोजना, 8 हजार करोड़ की लागत

यह 1000 मेगावाट पीएसपी परियोजना करीब 8 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है और इसे भारत की ऊर्जा संरचना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस परियोजना का संचालन और विकास THDC India Limited द्वारा किया गया है, जो देश की प्रमुख जलविद्युत विकास कंपनियों में से एक है।

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टिहरी बांध और विकास की नई कहानी

टिहरी बांध देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है, जो नौ राज्यों को बिजली आपूर्ति और कई क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही यह क्षेत्रीय विकास का महत्वपूर्ण केंद्र भी है।

टिहरी गढ़वाल में स्थित यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन का स्रोत है, बल्कि विकास और विस्थापन की जटिल कहानी भी अपने भीतर समेटे हुए है।

विस्थापन और संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

टिहरी बांध परियोजना के निर्माण के दौरान पुरानी टिहरी शहर पूरी तरह जलमग्न हो गई थी। इसके अलावा दर्जनों गांव भी इस परियोजना से प्रभावित हुए थे। हजारों परिवारों को नई टिहरी, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में पुनर्वासित किया गया।

आज यह परियोजना जहां ऊर्जा आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है, वहीं इसके पीछे लोगों के संघर्ष और पुनर्वास की लंबी कहानी भी जुड़ी हुई है।

क्षेत्रीय विकास को मिल सकती है नई गति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से टिहरी और आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। खासकर मेडिकल शिक्षा, ऊर्जा परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर सरकार की ओर से बड़े फैसले संभव हैं।

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