ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 2026: जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और अखंड कृपा पाने की संपूर्ण पूजा विधि
ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 2026: जानें मां दुर्गा की पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त, सटीक उदया तिथि और व्रत की सरल एवं संपूर्ण पूजन विधि।
ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 2026: हिंदू धर्म में मासिक दुर्गा अष्टमी का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। हर माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली मासिक दुर्गा अष्टमी पूर्ण रूप से शक्ति स्वरूपा मां जगदम्बा को समर्पित होती है। मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन सच्चे मन से व्रत रखकर आदिशक्ति की आराधना करता है, उसके जीवन से शारीरिक कष्ट, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगहाली हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की मासिक दुर्गा अष्टमी बेहद फलदायी मानी जा रही है। आइए जानते हैं कि इस साल ज्येष्ठ माह में यह व्रत किस दिन रखा जाएगा, पूजा के शुभ मुहूर्त क्या हैं और माता रानी को प्रसन्न करने की सही विधि क्या है।
ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 2026 की तिथि और उदया तिथि (Tithi & Date)
हिंदू पंचांग और दृक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 23 मई 2026 को सुबह 05 बजकर 04 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 24 मई 2026 को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर हो जाएगा।
सनातन धर्म में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को सर्वोपरि माना जाता है। इस गणना के आधार पर ज्येष्ठ मास की मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत और पूजन 23 मई 2026, शनिवार को ही किया जाएगा।
पूजा के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त (Subh Muhurat)
23 मई को मां दुर्गा की साधना के लिए दिनभर में कई अत्यंत शुभ मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें की गई पूजा का शीघ्र फल प्राप्त होता है:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:23 बजे से सुबह 05:08 बजे तक (आत्मिक शुद्धि और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ)
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक (महामुहूर्त, किसी भी शुभ कार्य के लिए)
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:39 बजे से शाम 07:01 बजे तक (संध्या आरती के लिए उत्तम)
अमृत काल मुहूर्त: रात 11:45 बजे से देर रात 01:21 बजे (मंत्र साधना और तांत्रिक पूजा के लिए विशेष)
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मां भगवती की सरल और संपूर्ण पूजा विधि (Puja Vidhi)
मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए भक्तों को इस विधि से पूजन करना चाहिए:
संकल्प और शुद्धिकरण: अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल या पीले रंग के) धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
चौकी की स्थापना: घर के मंदिर की सफाई करने के बाद एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें। उस पर लाल रंग का नया कपड़ा बिछाएं और माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
शृंगार और अर्पण: मां जगदम्बा को गंगाजल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं। इसके बाद माता रानी को लाल चुनरी, कुमकुम, अक्षत और लाल रंग के पुष्प (विशेषकर गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें। इस दिन मां को सोलह शृंगार की सामग्री चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कथा और मंत्र जाप: धूप-दीप प्रज्वलित करके दुर्गा अष्टमी की व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद माता के सिद्ध मंत्र ‘ॐ दुं दुर्गाय नमः’ का कम से कम 108 बार जाप करें।
आरती और भोग: अंत में पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की आरती गाएं और उन्हें हलवा-पूरी या फलों का भोग लगाएं। पूजा संपन्न होने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
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