धर्म

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 क्यों है खास? जानें सही तिथि, स्नान-दान मुहूर्त और धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 की तिथि, स्नान-दान मुहूर्त और धार्मिक महत्व जानें। अधिक मास में यह पूर्णिमा अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है।

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। साल 2026 की ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इस बार ज्येष्ठ मास में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का संयोग बन रहा है। यह संयोग लगभग तीन वर्षों में एक बार आता है, जिससे इस पूर्णिमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास स्वयं भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसे में जब पूर्णिमा तिथि भी इसी मास में पड़ती है, तो इसका पुण्य फल सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक माना जाता है।

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 की सही तिथि

पंचांग के अनुसार:

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 मई 2026, सुबह 11:57 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 31 मई 2026, दोपहर 2:14 बजे

उदयातिथि के आधार पर अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा 31 मई 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी।
इसी दिन स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठान करना सबसे शुभ माना गया है।

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 पर स्नान और दान के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं:

ब्रह्म मुहूर्त

सुबह 4:34 AM से 5:17 AM
इस समय स्नान-ध्यान और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

मुख्य स्नान-दान काल

सुबह से लेकर दोपहर 2:14 PM तक
यह अवधि सबसे उत्तम मानी जाती है, क्योंकि इसी समय पूर्णिमा तिथि प्रभावी रहती है।

अभिजित मुहूर्त

दोपहर 12:10 PM से 1:03 PM
इस समय पूजा-पाठ और दान करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं।

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ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

अधिक मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है।

इस पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि:

  • भगवान विष्णु की पूजा का विशेष फल मिलता है
  • माता लक्ष्मी की आराधना से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है
  • स्नान और दान से पापों का नाश माना जाता है
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा-सा दान भी कई गुना पुण्य प्रदान करता है।

क्या करें इस दिन?

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर ये कार्य विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं:

  • गंगा या पवित्र जल में स्नान
  • सत्यनारायण भगवान की कथा
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान
  • माता लक्ष्मी की आराधना

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