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डॉ. करन बरोट: डायल 112 जनरक्षक के पायलटों की मुख्य मांग है कि उन्हें उचित वेतन मिले

AAP नेता डॉ. करन बरोट ने गुजरात के डायल 112 जनरक्षक पायलटों के उचित वेतन, नियुक्ति में देरी और ट्रांसफर की समस्याओं पर सरकार से समाधान मांगा।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता डॉ. करन बरोट ने पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए बताया कि जब किसी परिवार के सदस्य को पुलिस विभाग में नौकरी मिलती है, तो उसे बहुत ही गौरव और जिम्मेदारी वाला पद माना जाता है। ऐसी नौकरी से परिवार में स्थिरता आती है, नियमित वेतन और भत्ते मिलते हैं, मेडिकल सुविधाएं और सरकारी लाभ प्राप्त होते हैं।

पुलिस विभाग में काम करने वाला व्यक्ति गुजरात और देश की जनता की सुरक्षा तथा रक्षा करता है। लेकिन इसी पुलिस विभाग में एक ऐसा भी हिस्सा है, जिसके बारे में आज मुझे बात करनी है और वह है ‘112 जनरक्षक पायलट‘।गुजरात की जनता को प्रेसवार्ता के माध्यम से डॉ. करन बरोट ने बताया कि ये वही पायलट हैं जो पूरे गुजरात में पुलिस की गाड़ियां चलाते हैं, जनता की रक्षा करते हैं और विषम परिस्थितियों में समय पर पहुंचकर लोगों की मदद करते हैं।

ये 112 जनरक्षक पायलट दिन-रात 24 घंटे गुजरात की जनता की सेवा में कार्यरत रहते हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इन पायलटों को सरकारी नौकरी के सभी लाभ नहीं मिलते हैं। उनकी मांग बस इतनी है कि उन्हें उचित तरीके से अपना जीवन-निर्वाह कर सकने जितना वेतन मिले और ट्रांसफर के समय समय पर गाड़ी मिले। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब उनकी भर्ती की जाती है, तब नौकरी के चयन और मंजूरी का ऑर्डर मिलने के बीच छह से आठ महीने की देरी होती है। इस अवधि के दौरान उन्हें बेरोजगार रहना पड़ता है और उधार पैसे लेकर जीवन गुजारना पड़ता है। एक वर्ष पहले भी 1200 से अधिक पायलट ऐसे थे, जिन्हें चयनित होने के बाद भी आठ-आठ महीने तक ऑर्डर नहीं मिला था। यह मुद्दा मैंने बार-बार सरकार के समक्ष रखा था। आज फिर से 112 जनरक्षक पायलटों के इस प्रश्न को मीडिया के माध्यम से गुजरात की जनता के सामने रखने आया हूं।

जनरक्षकों के आर्थिक संकट पर सरकार से सवाल

डॉ. करन बरोट ने आगे बताया कि आज मैं मीडिया मित्रों और गुजरात की जनता से पूछना चाहता हूं कि ₹20,000 जितने सीमित वेतन में आज के समय में महीने का खर्च कैसे निकालें और परिवार का भरण-पोषण कैसे करें? पहले ये 112 जनरक्षक पायलट 12 घंटे तक लगातार गुजरात की जनता के लिए ड्यूटी करते थे। इसके बाद नौकरी के घंटे 12 से घटाकर 8 घंटे किए गए, इस निर्णायक कदम पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन घंटे घटाने के साथ उनका वेतन ₹20,000 से घटाकर लगभग ₹14,000 कर दिया गया! जो लोग ₹20,000 में मुश्किल से जीवन-निर्वाह कर पाते थे, वे ₹14,000 में परिवार कैसे चलाएंगे? यह एक बड़ा सवाल है। पुलिस विभाग का नाम आते ही लोगों में मान-सम्मान की भावना होती है, लेकिन इसी विभाग में रहकर जो पायलट ‘जनरक्षक’ बनकर दिन-रात जनता की सेवा के लिए दौड़ते हैं, उनकी रक्षा के लिए आज कौन खड़ा है?

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बिना पूर्व सूचना के जून महीने का वेतन बढ़ोतरी के साथ पायलटों के खाते में जमा हुआ, और जुलाई के वेतन में भी जून महीने की राशि की भरपाई करने के नाम पर कटौती की गई। इस अचानक हुई कटौती के कारण आज ये पायलट भारी आर्थिक संकट में आ गए हैं। जो पायलट पूरे गुजरात की रक्षा करते हैं, उनके आर्थिक संकट के समय उनकी रक्षा कौन करेगा?

सरकार 112 पायलटों से संवाद कर उनका हक दे

मुझे सरकार से कहना है कि, आप सरकारी महोत्सव करते हैं, बड़े-बड़े बैनर-पोस्टर के पीछे करोड़ों रुपये खर्च करते हैं और सरकारी कार्यक्रमों में महंगे व्यंजनों तथा काजू कतरी के नाम पर हजारों-करोड़ों का खर्च होता है। लेकिन जो Gen-Z और युवा देश सेवा के लिए डायल 112 सेवाओं में रात-दिन काम कर रहे हैं, उनके साथ संवाद करने के लिए सरकार के पास समय क्यों नहीं है? इन युवाओं को आर्थिक परेशानी से बाहर कौन निकालेगा? इन डायल 112 जनरक्षक पायलटों का जब एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर होता है, तब लंबे समय तक गाड़ी नहीं मिलने के कारण वे बेरोजगार बैठने को मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा ₹12,000 भरवाकर ट्रेनिंग पूरी करवाने के बाद भी उन्हें नौकरी पर रखने में देरी की जाती है।

ये पायलट पुलिस विभाग में नींव के पत्थर बनकर काम करते हैं और ओवरवॉच (निगरानी) रखकर गुजरात की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। वे सरकार से कोई दया या उपकार नहीं मांगते, बल्कि अपना हक और न्याय मांगते हैं। आम आदमी पार्टी की ओर से मैं सरकार से विनती करता हूं कि, जिस तरह सरकार युवा संवाद और Gen-Z संवाद के कार्यक्रम करती है, उसी तरह इन 112 जनरक्षक पायलटों के साथ भी आमने-सामने संवाद करके उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान लाए। इन युवाओं और जनरक्षक पायलटों को न्याय दिलाने के लिए आम आदमी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और जहां भी जरूरत होगी वहां लड़ाई लड़ती रहेगी।

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