PM CARES Fund में ₹8,452 करोड़ का कॉर्पस, खर्च सिर्फ ₹87.85 लाख; पारदर्शिता पर उठे सवाल
PM CARES Fund का कॉर्पस 31 मार्च 2025 तक ₹8,452 करोड़ पहुंचा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में सिर्फ ₹87.85 लाख खर्च हुए। पारदर्शिता पर सवाल उठे।
कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए PM CARES Fund को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक फंड का कुल कॉर्पस ₹8,452.06 करोड़ पहुंच गया। वहीं, पूरे वित्तीय वर्ष में फंड से केवल ₹87.85 लाख खर्च किए गए।
रिपोर्ट में सामने आए इन आंकड़ों ने फंड के इस्तेमाल, जमा राशि और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, PM CARES Fund के संचालन को लेकर केंद्र सरकार का पक्ष है कि यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है और इसे स्वैच्छिक योगदान के जरिए चलाया जाता है।
93% रकम FD में जमा| PM CARES Fund
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, फंड की कुल राशि का करीब 93 प्रतिशत हिस्सा बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा गया है। करीब ₹7,846.65 करोड़ की राशि FD में जमा बताई गई है, जबकि बाकी रकम बैंकों के कैश और सेविंग अकाउंट में रखी गई है।
वित्त वर्ष 2024-25 में फंड को घरेलू स्रोतों से करीब ₹479.04 करोड़ और विदेशी स्रोतों से लगभग ₹92.83 लाख का योगदान प्राप्त हुआ। यानी कुल नए योगदान की राशि करीब ₹480 करोड़ रही।
ब्याज से भी हुई बड़ी कमाई
बैंकों में जमा रकम से PM CARES Fund को वित्त वर्ष के दौरान करीब ₹475 करोड़ का ब्याज मिला। इसमें FD से लगभग ₹469.37 करोड़ और सेविंग अकाउंट से करीब ₹5.77 करोड़ की ब्याज आय शामिल है।
इस तरह फंड को मिले नए दान और बैंक जमा से हुई ब्याज आय लगभग समान स्तर पर रही।
₹87.85 लाख में से अधिकांश बच्चों की योजना पर खर्च
ऑडिट विवरण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में कुल खर्च ₹87.85 लाख रहा। इसमें से ₹87.84 लाख PM CARES for Children Scheme के तहत खर्च किए गए।
इसके अलावा बैंक और SMS शुल्क के रूप में सिर्फ ₹451 खर्च होने का उल्लेख है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर फंड में ₹8,452.06 करोड़ का क्लोजिंग बैलेंस मौजूद था।
₹324.66 करोड़ की वापसी भी दर्ज
ऑडिट स्टेटमेंट में कार्यान्वयन एजेंसियों से ₹324.66 करोड़ की रकम वापस आने का भी उल्लेख किया गया है। इनमें DRDO और NHAI जैसी एजेंसियों के नाम सामने आते हैं।
पिछले वित्तीय वर्ष में ऐसी वापसी करीब ₹84.31 करोड़ थी। हालांकि, उपलब्ध ऑडिट स्टेटमेंट में यह विस्तृत जानकारी नहीं दी गई कि यह राशि किन परियोजनाओं या कार्यों के लिए जारी की गई थी और बाद में इसे वापस क्यों किया गया।
ऑडिट रिपोर्ट की टाइमिंग पर भी सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद कुछ पारदर्शिता कार्यकर्ताओं और वित्तीय विशेषज्ञों ने ऑडिट प्रक्रिया और फंड से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठाई है।
पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर फंड में बड़ी राशि के जमा रहने और विस्तृत ऑडिट नोट्स सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए। वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल मोदानी ने रिपोर्ट पर हस्ताक्षर होने में लगे समय और वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज में UDIN का उल्लेख नहीं होने की ओर ध्यान दिलाया।
सीए रुचिरा वाघानी ने भी फंड में आने वाली बड़ी रकम और अपेक्षाकृत कम खर्च के बीच अंतर पर सवाल उठाया है।
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राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़े सामने आने के बाद PM CARES Fund को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। कुछ राजनीतिक नेताओं और संगठनों ने फंड के संचालन और रकम के इस्तेमाल की अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
वहीं, केंद्र सरकार का रुख रहा है कि PM CARES Fund एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है, जिसे स्वैच्छिक योगदान से संचालित किया जाता है और इसमें सरकारी बजट से नियमित आवंटन नहीं होता।
RTI और CAG को लेकर क्या है स्थिति?
PM CARES Fund की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। केंद्र सरकार ने इसे पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट बताते हुए RTI कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना है। इसी तरह, यह फंड नियमित CAG ऑडिट के दायरे में नहीं आता।
अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने PM CARES Fund की राशि को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) में ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
आंकड़ों ने फिर बढ़ाई पारदर्शिता की बहस
कोविड महामारी के दौरान आपातकालीन राहत के लिए बनाए गए इस फंड में बड़ी राशि जमा होने और वित्त वर्ष 2024-25 में अपेक्षाकृत बेहद कम खर्च दर्ज होने के बाद पारदर्शिता को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, फंड का बड़ा हिस्सा अभी भी बैंक जमा और FD के रूप में मौजूद है। अब बहस इस बात पर केंद्रित है कि फंड में उपलब्ध राशि के इस्तेमाल और विभिन्न एजेंसियों को जारी की गई रकम से जुड़ी विस्तृत जानकारी कितनी सार्वजनिक होनी चाहिए।
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