सावन के अंतिम दिन जरूर करें ये 7 काम, मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा, घर में आएगी सुख-समृद्धि
सावन के अंतिम दिन भगवान शिव, मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के साथ करें ये 7 उपाय। जानें श्रावण पूर्णिमा के खास धार्मिक उपाय।
सावन का पवित्र महीना अब समाप्त होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन के अंतिम दिन श्रावण पूर्णिमा मनाई जाती है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन रक्षाबंधन समेत कई पर्व मनाए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
इस साल सावन महीने का समापन 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ होगा। श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह तक रहने की जानकारी दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष पूजा-पाठ और दान-पुण्य के कार्य करने से शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं।
सावन के अंतिम दिन करें भगवान शिव का अभिषेक
सावन के अंतिम दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव के मंदिर जाना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने के बाद साफ जल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मकता दूर करने में मदद मिलती है।
2. भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें
श्रावण पूर्णिमा की शाम भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मखाने की खीर का भोग लगाया जा सकता है। इसके साथ कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने की परंपरा है।
मान्यता है कि इस तरह पूजा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और धन-धान्य की समृद्धि की कामना की जाती है।
3. मां लक्ष्मी को पीली कौड़ियां और अक्षत चढ़ाएं
माता लक्ष्मी की पूजा के दौरान पांच साबुत पीली कौड़ियां और अक्षत अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद इन्हें लाल रेशमी कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रखने की मान्यता है।
धार्मिक विश्वास के अनुसार यह उपाय आर्थिक समृद्धि और घर में धन की स्थिरता के लिए किया जाता है।
4. चंद्र देव को अर्घ्य दें
श्रावण पूर्णिमा की रात चंद्र देव की पूजा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। चांदी के पात्र में साफ पानी, थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं।
अर्घ्य देते समय ‘ॐ चंद्राय नमः’ मंत्र का तीन बार जाप करने की धार्मिक परंपरा है। मान्यता के अनुसार इससे घर में सुख और शांति की कामना की जाती है।
also read:- शारदीय नवरात्रि 2026 कब से है? 11 अक्टूबर से शुरू होंगे…
5. पवित्र नदी में स्नान करें
सावन के अंतिम दिन गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने को पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
यदि किसी पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर स्नान के पानी में थोड़ी मात्रा में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।
6. जरूरतमंदों को दान करें
श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को तिल, चावल, सफेद वस्त्र, दूध अथवा भोजन का दान करने की परंपरा है। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि दान-पुण्य से व्यक्ति को मानसिक संतोष मिलता है और परिवार के लिए सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
7. पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं
सावन के अंतिम दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। इसके साथ पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है।
मान्यता के अनुसार इस उपाय से देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहने की कामना की जाती है।
सावन के अंतिम दिन क्यों खास है यह तिथि?
श्रावण पूर्णिमा भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिन रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाते हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस दिन पूजा, दान और सेवा जैसे कार्यों का विशेष महत्व माना गया है।
हालांकि, इन उपायों को धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के रूप में ही देखना चाहिए। इनके परिणामों की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। श्रद्धालु अपनी आस्था और सुविधा के अनुसार पूजा-पाठ तथा दान कर सकते हैं।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



