विश्वकर्मा पूजा 2026: सितंबर में इस दिन होगी पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की सरल विधि
विश्वकर्मा पूजा 2026 इस साल 17 सितंबर को होगी। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, पूजा विधि और भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लाभ।
हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी और वास्तुकला के महान ज्ञाता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि उन्होंने देवी-देवताओं के लिए कई भव्य भवनों, नगरों और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। यही वजह है कि हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। विश्वकर्मा पूजा 2026 में भी देशभर के कारखानों, दुकानों, वर्कशॉप और कार्यालयों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
कब मनाई जाएगी विश्वकर्मा पूजा?
साल 2026 में भगवान विश्वकर्मा की जयंती 17 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन विश्वकर्मा पूजा 2026 का पर्व भी होगा। इस अवसर पर लोग अपने कार्यस्थल को साफ-सुथरा कर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं और औजारों, मशीनों तथा काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या संक्रांति के दिन सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। इसी अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा का विधान माना गया है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
विश्वकर्मा पूजा 2026 के लिए पूजा का शुभ समय सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक बताया गया है।
वहीं, अभिजीत मुहूर्त को विशेष शुभ माना जाता है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान विश्वकर्मा की पूजा करना शुभ माना जाता है।
हालांकि, पूजा का समय स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा क्यों की जाती है?
धार्मिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने द्वारका, इंद्रप्रस्थ और कई अन्य महत्वपूर्ण निर्माणों के साथ देवी-देवताओं के लिए दिव्य अस्त्र और भवन तैयार किए थे।
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इसी वजह से कारीगर, इंजीनियर, उद्योगपति, दुकानदार और मशीनों से जुड़े लोग इस दिन अपने काम के उपकरणों और कार्यस्थल की पूजा करते हैं। इसका उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और कार्यक्षेत्र की उन्नति की कामना करना होता है।
विश्वकर्मा पूजा की सरल विधि
विश्वकर्मा पूजा 2026 के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और अपने कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर को उचित स्थान पर स्थापित करें।
पूजा में भगवान को फूल, अक्षत, रोली, हल्दी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। इसके साथ ही मशीनों, औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर भी रोली और हल्दी का तिलक लगाया जाता है।
पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए संबंधित मंत्रों का जाप किया जाता है। श्रद्धालु भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके औजार और मशीनें बिना किसी बाधा के चलते रहें तथा कारोबार और कार्यक्षेत्र में लगातार प्रगति हो।
पूजा पूरी होने के बाद भगवान विश्वकर्मा को प्रणाम करें और परिवार, कर्मचारियों तथा अन्य लोगों में प्रसाद वितरित करें।
विश्वकर्मा पूजा से जुड़ी मान्यताएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजा 2026 के अवसर पर विधि-विधान से पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सकारात्मकता आती है और कारोबार में तरक्की की कामना पूरी होती है।
मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से व्यक्ति को धन, समृद्धि और ऐश्वर्य का आशीर्वाद मिल सकता है। मशीनरी और औजारों की पूजा करने की परंपरा के पीछे भी यही विश्वास है कि कार्यों में बाधाएं कम हों और उपकरण सुरक्षित एवं लंबे समय तक उपयोगी बने रहें।
यह भी माना जाता है कि इस दिन वाहनों और मशीनों की पूजा करने से उनसे जुड़े कार्यों में शुभता बनी रहती है।
कार्यस्थल पर विशेष पूजा की तैयारी
फैक्ट्री, वर्कशॉप, दुकान या कार्यालय में पूजा से पहले साफ-सफाई करना इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कई जगहों पर कर्मचारी और कारोबारी मिलकर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं और प्रसाद बांटते हैं।
इस तरह विश्वकर्मा पूजा 2026 केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि काम, हुनर, मशीनरी और मेहनत के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी है।
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