ऋषि पंचमी 2026: कब है यह पर्व? इस दिन हल से उगा अन्न क्यों नहीं खाते, जानें धार्मिक मान्यता और पूजा विधि
ऋषि पंचमी 2026 कब है? जानें 15 सितंबर की सही तारीख, पूजा का महत्व, शुभ नियम और इस दिन हल से उगा अन्न न खाने की धार्मिक मान्यता।
ऋषि पंचमी 2026: हिंदू धर्म में ऋषि पंचमी को आत्मशुद्धि, संयम और प्रायश्चित से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। विशेष रूप से महिलाओं के लिए इस व्रत का धार्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन सप्तर्षियों और माता अरुंधती की पूजा करने की परंपरा है। साथ ही व्रत के दौरान कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है।
ऋषि पंचमी 2026 कब मनाई जाएगी?
पंचांग के अनुसार, ऋषि पंचमी 2026 का पर्व 15 सितंबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 16 सितंबर को सुबह 8 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। इस अवसर पर श्रद्धालु सप्तर्षियों के साथ माता अरुंधती का पूजन करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए प्रायश्चित और आत्मशुद्धि की भावना से किया जाता है। इसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है।
हल से उगा अन्न क्यों नहीं खाया जाता?
ऋषि पंचमी 2026 से जुड़े प्रमुख नियमों में हल से जोती गई भूमि में पैदा होने वाले अनाज का सेवन न करना भी शामिल है। परंपरागत रूप से व्रत के दौरान गेहूं, सामान्य चावल और हल से खेती किए गए अन्य अनाज से परहेज किया जाता है।
इसके बजाय कई परिवारों में फल, कंद-मूल और कुछ प्रकार के शाकाहारी खाद्य पदार्थों का सेवन करने की परंपरा है। हालांकि, खान-पान के नियम अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की धार्मिक परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं।
इस नियम के पीछे धार्मिक मान्यता अहिंसा और संयम से जुड़ी है। माना जाता है कि जमीन को हल से जोतने की प्रक्रिया में मिट्टी के भीतर मौजूद सूक्ष्म जीवों को नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से इस दिन हल से जुड़ी खेती के अन्न का त्याग करने की परंपरा विकसित हुई।
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सप्तर्षियों और अरुंधती की पूजा का महत्व
ऋषि पंचमी 2026 के दिन सप्तर्षियों का पूजन किया जाता है। इनमें कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि शामिल हैं। इनके साथ माता अरुंधती की भी पूजा की जाती है।
पूजा के दौरान श्रद्धालु ऋषियों का स्मरण करते हुए जल, अक्षत, फूल, चंदन, धूप और दीप अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत और पूजा के माध्यम से व्यक्ति अपने जाने-अनजाने हुए दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना करता है।
ऋषि पंचमी की सरल पूजा विधि
ऋषि पंचमी 2026 पर पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर एक चौकी पर सप्तर्षियों और माता अरुंधती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
सबसे पहले सप्तर्षियों का ध्यान और आह्वान करें।
जल, अक्षत, पुष्प, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें।
सप्तर्षियों के साथ माता अरुंधती की पूजा करें।
ऋषियों को जल अर्पित कर सुख-शांति की प्रार्थना करें।
अपनी जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा मांगें।
ऋषि पंचमी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन करें।
सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य सामग्री का दान करें।
व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
ऋषि पंचमी 2026 के व्रत में भोजन से जुड़े नियमों का पालन अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार करना चाहिए। कई परंपराओं में हल से उगे अनाज का सेवन नहीं किया जाता, जबकि फल और कंद-मूल को व्रत के भोजन में शामिल किया जाता है।
इस पर्व का मुख्य उद्देश्य केवल खान-पान के नियमों तक सीमित नहीं माना जाता। इसे आत्मसंयम, सात्त्विक जीवन, ऋषि परंपरा के प्रति सम्मान और अपने कर्मों की समीक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने से मन को शांति मिलती है तथा व्यक्ति सकारात्मक भाव के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेता है।
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