मनोज सोरठिया ने जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर BJP पर निशाना साधा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने की मांग की।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के गुजरात प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरठिया ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल युवाओं, Gen Z और नेताओं की आवाज दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सोरठिया के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उठाए जा रहे कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
मनोज सोरठिया का जंतर-मंतर आंदोलन पर बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। AAP नेता ने दावा किया कि पिछले दो दिनों से आंदोलन को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है और ट्रेन सेवाओं, मेट्रो स्टेशनों तथा इंटरनेट को लेकर भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
युवाओं की आवाज दबाने का लगाया आरोप
मनोज सोरठिया ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने ब्रिटिश शासन का जिक्र किया और कहा कि लोगों की आवाज दबाने के ऐसे प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत हैं।
AAP नेता ने कहा कि किसी भी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सत्ता में बैठे लोगों तक जनता की समस्याएं और मांगें पहुंचाना होता है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने यह उद्देश्य हासिल कर लिया है, क्योंकि अब इस मुद्दे पर देशभर में चर्चा हो रही है।
उन्होंने युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि प्रदर्शन को रोकने के लिए जितने अधिक प्रयास किए जाएंगे, उतने ही ज्यादा युवा राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दों के प्रति जागरूक हो सकते हैं। सोरठिया ने BJP पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है।
अमित शाह और नरेंद्र मोदी पर भी साधा निशाना
अपने बयान में मनोज सोरठिया ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने अमित शाह के लिए तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि सरकार की कार्रवाई से प्रधानमंत्री की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच रहा है।
सोरठिया ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। AAP नेता का दावा है कि मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। इस आंकड़े और इससे जुड़े आरोपों की पुष्टि आधिकारिक चुनावी आंकड़ों से किया जाना आवश्यक है।
मनोज सोरठिया का जंतर-मंतर आंदोलन पर बयान केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की व्यवस्था में बदलाव की मांग भी उठाई।
जंतर-मंतर आंदोलन की तीन प्रमुख मांगें
मनोज सोरठिया ने प्रदर्शन से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों का जिक्र किया। उनके अनुसार, इन मांगों का संबंध मतदाता सूची, मुख्य चुनाव आयुक्त की जवाबदेही और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता से है।
1. मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया रद्द हो: सोरठिया ने आरोप लगाया कि करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने इस प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। हालांकि, नाम हटाए जाने की वास्तविक संख्या और परिस्थितियों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से जरूरी है।
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2. ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए: AAP नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
3. मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव हो: सोरठिया ने मौजूदा चयन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पुरानी व्यवस्था जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग की। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में केंद्र सरकार का एक मंत्री, विपक्ष का एक प्रतिनिधि और सुप्रीम कोर्ट का एक न्यायाधीश शामिल होना चाहिए।
उनका तर्क है कि चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भागीदारी से पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों और संवैधानिक प्रक्रिया को ध्यान में रखना होगा।
युवाओं की भागीदारी को बताया आंदोलन की ताकत
मनोज सोरठिया ने आंदोलन में शामिल युवाओं की हिम्मत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि युवा अपने अधिकारों, चुनावी व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, युवाओं की जागरूकता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
AAP नेता ने कहा कि दिल्ली में हो रही घटनाओं पर गुजरात के लोग भी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर के आंदोलन का असर गुजरात की राजनीति पर भी पड़ सकता है और लोग राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं।
मनोज सोरठिया का जंतर-मंतर आंदोलन पर बयान गुजरात में भी राजनीतिक बहस को तेज करने वाला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा और आम नागरिक लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखेंगे।
चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस तेज
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर मनोज सोरठिया के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। AAP नेता ने पुलिस कार्रवाई, मतदाता सूची में कथित बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
उनकी ओर से लगाए गए आरोपों और पेश किए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है। साथ ही, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को आधिकारिक तथ्यों तथा लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर समझना जरूरी है।
मनोज सोरठिया का जंतर-मंतर आंदोलन पर बयान इस बात को रेखांकित करता है कि प्रदर्शन और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे अब राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। आने वाले समय में इन मांगों पर संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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