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AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर उठाए सवाल: एक्साइज पॉलिसी केस में ‘हितों के टकराव’ का आरोप

AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए एक्साइज पॉलिसी केस में हितों के टकराव का आरोप लगाया। न्यायमूर्ति के बच्चों की नियुक्तियों पर उठाए सवाल।

दिल्ली की वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और आम आदमी पार्टी (AAP) की प्रमुख नेता आतिशी ने आबकारी नीति (Excise Policy) मामले में एक नया विवाद छेड़ दिया है। AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही और जजों की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

क्या है ‘हितों के टकराव’ का पूरा मामला?

आतिशी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए न्यायमूर्ति स्वरना कांत शर्मा से जुड़े संभावित “हितों के टकराव” (Conflict of Interest) का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि न्यायमूर्ति के दोनों बच्चे—इशान शर्मा और शंभवी शर्मा—वर्तमान में केंद्र सरकार के पैनल वकील के रूप में कार्यरत हैं।

AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये नियुक्तियां साल 2025 में हुई थीं और ये दोनों वकील सीधे तौर पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम कर रहे हैं।

सॉलिसिटर जनरल की भूमिका और केस की सुनवाई
आतिशी का मुख्य तर्क यह है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ही यह तय करते हैं कि सरकारी पैनल के वकीलों को कौन से केस मिलेंगे और उनकी आय क्या होगी। वहीं दूसरी ओर, वही तुषार मेहता आबकारी नीति जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में न्यायमूर्ति स्वरना कांत शर्मा की अदालत में पेश हो रहे हैं।

“जब न्यायाधीश के परिवार के सदस्यों का पेशेवर भविष्य केंद्र सरकार के हाथों में हो, तो क्या उस अदालत से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है?” — आतिशी

इस संबंध को उजागर करते हुए, AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए और मांग की कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।

असामान्य सुनवाई की तारीखों पर आपत्ति

आतिशी ने सुनवाई की गति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआई (CBI) द्वारा दायर की गई रिवीजन पिटीशन में अदालत द्वारा असामान्य रूप से कम अंतराल पर सुनवाई की तारीखें दी जा रही हैं। गौरतलब है कि निचली अदालत (Trial Court) ने पहले ही इस मामले में अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं को आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया था, जिसे सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

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AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी जल्दबाजी और पारिवारिक संबंधों के बीच एक गहरा संदेह पैदा होता है जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

पारदर्शिता की मांग और राजनीतिक घमासान

यह पहली बार नहीं है जब आम आदमी पार्टी ने न्यायपालिका के किसी फैसले या प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है, लेकिन जजों के बच्चों की सरकारी नियुक्तियों का मुद्दा उठाकर आतिशी ने इस बहस को और तेज कर दिया है। AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाकर सीधे तौर पर न्यायपालिका और केंद्र सरकार के बीच के कथित “नेक्सस” पर निशाना साधा है।

फिलहाल, इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। जहाँ कुछ इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमला मान रहे हैं, वहीं AAP समर्थकों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे सवाल उठाना अनिवार्य है। AAP नेता आतिशी ने न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल उठाकर स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस कानूनी लड़ाई को सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पुरजोर तरीके से लड़ेगी।

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