AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाते हुए दिल्ली HC की न्यायमूर्ति के बच्चों की सरकारी नियुक्ति पर चिंता जताई। पढ़ें पूरी खबर।
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने हाल ही में न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार के साथ जजों के संबंधों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
न्यायमूर्ति के बच्चों की नियुक्तियों पर विवाद
सौरभ भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से कुछ चौंकाने वाले तथ्य साझा किए। उन्होंने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वरना कांत शर्मा के पुत्र इशान शर्मा और पुत्री शंभवी शर्मा को सितंबर और नवंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा ‘पैनल काउंसल्स’ के रूप में नियुक्त किया गया था।
सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाते हुए यह तर्क दिया कि जब किसी न्यायाधीश के बच्चों का करियर सीधे तौर पर केंद्र सरकार के अधीन हो, तो क्या वह न्यायाधीश केंद्र सरकार के खिलाफ मामलों में निष्पक्ष रह सकते हैं?
सीबीआई और सॉलिसिटर जनरल की भूमिका
भारद्वाज ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि सीबीआई (CBI), जो कि केंद्र सरकार की एजेंसी है, न्यायमूर्ति स्वरना कांत शर्मा की अदालत में अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं के खिलाफ मामले लड़ रही है। इस दौरान केंद्र का पक्ष सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता रखते हैं।
“जब न्यायाधीश के बच्चों की नियुक्ति में केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल की भूमिका हो, तो क्या यह हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला नहीं है?” सौरभ भारद्वाज
इस स्थिति को देखते हुए, सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल खड़े किए हैं और पूछा है कि क्या ऐसी परिस्थितियों में दिल्ली के मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं को न्याय मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
also read:- मोदी सरकार की विदेश नीति पर संजय सिंह ने उठाए गंभीर सवाल,…
Justice Swarana Kanta Sharma’s son Ishaan Sharma & daughter Shambhavi Sharma were both empanelled as Union Govt panel counsels (Delhi HC & Supreme Court) in Sept & Nov 2025.
The same Central Govt (via CBI) represented by SG of Central Govt Adv Tushar Mehta is appearing before… https://t.co/F51osVwsxj
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) April 9, 2026
RSS के कार्यक्रमों में भागीदारी पर आपत्ति
नियुक्तियों के अलावा, भारद्वाज ने वैचारिक झुकाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायमूर्ति स्वरना कांत शर्मा ने पूर्व में आरएसएस (RSS) से जुड़े अधिवक्ताओं के संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायपालिका को किसी भी राजनीतिक या वैचारिक संगठन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।
क्या खतरे में है न्यायिक निष्पक्षता?
आम आदमी पार्टी लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है। अब, सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाकर सीधे तौर पर अदालती कार्यवाही की पारदर्शिता को चुनौती दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।
यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जहाँ एक ओर AAP इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसे न्यायपालिका की गरिमा पर हमले के रूप में भी देखा जा रहा है। सौरभ भारद्वाज ने न्यायिक पक्षपात पर सवाल उठाकर इस बहस को जन्म दे दिया है कि क्या न्यायाधीशों के परिजनों की सरकारी नियुक्तियों के लिए कोई सख्त गाइडलाइन होनी चाहिए।
For English News: http://newz24india.in
Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x



