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निर्जला एकादशी 2026: क्या 27 मई को है व्रत? जानें सही तारीख और पूरा शेड्यूल

निर्जला एकादशी 2026 की सही तारीख 25 जून है। जानें व्रत का मुहूर्त, महत्व और 27 मई को क्यों नहीं है यह एकादशी।

निर्जला एकादशी 2026 को लेकर इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोग मान रहे हैं कि यह व्रत 27 मई को पड़ सकता है, लेकिन पंचांग के अनुसार इस बार निर्जला एकादशी की वास्तविक तिथि अलग है।

हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को साल की सबसे महत्वपूर्ण और कठिन एकादशी माना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी या पाण्डव एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन बिना पानी और अन्न ग्रहण किए व्रत रखने का विधान है।

निर्जला एकादशी 2026 की सही तारीख

इस वर्ष निर्जला एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।

वहीं 27 मई 2026 को पद्मिनी एकादशी पड़ रही है, जिसके कारण लोगों में तारीख को लेकर कन्फ्यूजन फैल गया है।

इस बदलाव की वजह अधिक मास (मलमास) को बताया जा रहा है, जो 17 मई से 15 जून तक रहेगा। इसी कारण निर्जला एकादशी की तिथि आगे बढ़ गई है।

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निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त

एकादशी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात 8:09 बजे
पारण समय: 26 जून 2026, सुबह 05:25 से 08:13 बजे तक

इस दौरान व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है।

निर्जला एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत रखने से सालभर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

जो लोग पूरे साल सभी एकादशी व्रत नहीं रख पाते, उनके लिए यह एक व्रत विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

पौराणिक कथा (भीमसेनी एकादशी)

निर्जला एकादशी की कथा महाभारत काल के भीमसेन से जुड़ी है। भीम भोजन के बिना लंबे समय तक उपवास नहीं कर पाते थे, जबकि उनके भाई और द्रौपदी सभी एकादशी व्रत रखते थे।

समाधान के लिए उन्होंने महर्षि व्यास से मार्गदर्शन लिया। व्यास जी ने उन्हें केवल निर्जला एकादशी का कठोर व्रत रखने की सलाह दी, क्योंकि यह व्रत सभी एकादशियों के बराबर फल देने वाला माना गया है।

इसके बाद भीम ने श्रद्धा से यह व्रत करना शुरू किया और तभी से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।

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