धर्म

Bhishma Ashtami 2026: भीष्म पितामह को कैसे मिला ‘इच्छा मृत्यु’ का वरदान, जानें पौराणिक कथा

Bhishma Ashtami 2026: जानें कैसे महाभारत के वीर भीष्म पितामह को मिला ‘इच्छा मृत्यु’ का वरदान, उनका जीवन और पौराणिक कथा का महत्व।

Bhishma Ashtami 2026: 26 जनवरी को माघ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर भीष्म अष्टमी मनाई जाती है। यह दिन महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्हें पिता की खुशी के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लेने के कारण इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त हुआ था।

भीष्म पितामह की वीरता और जीवन| Bhishma Ashtami 2026

महाभारत में भीष्म पितामह को गंगापुत्र कहा गया है। उनकी माता देवी गंगा और पिता राजा शांतनु थे। बचपन से ही वे युद्धकला में निपुण और वीर थे। भीष्म पितामह ने कौरवों के विरुद्ध युद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया और युद्ध के दौरान घायल होने के बाद उत्तरायण होने पर प्राण त्यागे।

इच्छा मृत्यु का वरदान कैसे मिला?

कथा के अनुसार, राजा शांतनु अपनी मनचाही सत्यवती से विवाह करना चाहते थे। सत्यवती के पिता ने कहा कि उनका पुत्र ही भविष्य में राजा बनेगा। इस शर्त को पूरा करने के लिए भीष्म पितामह ने अपने पिता की खुशी हेतु आजिवन ब्रह्मचर्य का संकल्प लिया। राजा शांतनु की प्रसन्नता देखकर उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्रदान किया गया।

also read:- माघ माह 2026: 3 या 4 जनवरी से शुरू, जानें क्या करें और क्या नहीं

भीष्म अष्टमी का महत्व| Significance of Bhishma Ashtami

भीष्म अष्टमी के दिन पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की तर्पण और एकोदिष्ट श्राद्ध किया जाता है। यह दिन विशेष रूप से माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है।

धार्मिक महत्व: माघ मास में स्नान, दान और पूजा-अर्चना से पापों का नाश होता है।

श्राद्ध और तर्पण: भीष्म पितामह के सम्मान में पितृ तर्पण किया जाता है।

सूर्योदय और उत्तरायण: सूर्य के उत्तरायण होने पर भीष्म ने प्राण त्यागे, जो जीवन और धर्म का प्रतीक है।

कैसे करें पूजा और श्रद्धा

इस दिन त्रिवेणी संगम या पवित्र नदियों में स्नान करें।

घर पर गंगाजल और तिल मिलाकर पूजा करें।

पितरों के तर्पण और दान करें।

मांसाहार, शराब और तामसिक कार्यों से बचें।

Visit WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029Vb4ZuKSLSmbVWNb1sx1x

Related Articles

Back to top button