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मुंशी प्रेमचंद जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि, साहित्यिक योगदान को किया नमन

देश के शीर्ष नेताओं ने मुंशी प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक चेतना, समानता और मानवीय मूल्यों का अमूल्य धरोहर बताया

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर पीएम नरेंद्र मोदी, ओम बिरला और अमित शाह ने श्रद्धांजलि दी। उनके साहित्य को सामाजिक चेतना और समानता का अमर संदेश बताया।

हिंदी और भारतीय साहित्य के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। तीनों नेताओं ने अपने संदेशों में प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रही हैं।

पीएम मोदी बोले- प्रेमचंद की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को सशक्त अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि प्रेमचंद के अमूल्य साहित्यिक योगदान ने उनकी जन्मस्थली और कर्मभूमि काशी की साहित्यिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि सामाजिक समानता और यथार्थ पर आधारित उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी।

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ओम बिरला ने बताया सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी हथियार बनाया। उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं और आम जनजीवन के संघर्ष, स्वाभिमान और उम्मीदों को अपनी लेखनी से जीवंत रूप दिया।

ओम बिरला ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं ने सामाजिक बुराइयों, आर्थिक असमानता और अन्याय के खिलाफ जनचेतना को मजबूत किया। उनके विचार आज भी न्यायपूर्ण, संवेदनशील और समरस समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं।

अमित शाह ने कहा- ‘कहानी सम्राट’ की रचनाएं आज भी जीवंत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंशी प्रेमचंद को ‘कहानी सम्राट’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने साहित्य में समाज की पीड़ा, शोषण और असमानताओं को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की बाल कहानियों ने भी सरल भाषा में बच्चों के मनोभावों और संवेदनाओं को जीवंत किया। अमित शाह के अनुसार, आज भी प्रेमचंद का साहित्य आदर्श लेखन को समझने और समाज की वास्तविकताओं को जानने का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।

भारतीय साहित्य के अमर हस्ताक्षर

मुंशी प्रेमचंद को हिंदी और उर्दू साहित्य के सबसे प्रभावशाली लेखकों में गिना जाता है। उनकी कालजयी कृतियां आज भी भारतीय समाज, मानवीय मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूती प्रदान करती हैं। उनकी जयंती पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है।

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