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पांच बैठकों में 12 घंटे से ज्यादा काम: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शीतकालीन सत्र का ब्योरा, चार विधेयक पारित

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शीतकालीन सत्र का ब्योरा साझा किया। पांच बैठकों में 12 घंटे 39 मिनट की कार्यवाही हुई, चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए और पर्यावरण संरक्षण व जनहित पर चर्चा हुई।

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आठवीं दिल्ली विधानसभा के चौथे शीतकालीन सत्र का विस्तृत ब्योरा साझा किया। यह सत्र 5 से 9 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ और कुल पांच बैठकें सम्पन्न हुईं, जिनमें लगभग 12 घंटे 39 मिनट की कार्यवाही हुई। इस दौरान विधायी, वित्तीय और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और कई निर्णय लिए गए।

सत्र में कुल 351 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 60 तारांकित और 263 अतारांकित प्रश्न शामिल थे। इसके अलावा 124 विशेष उल्लेख प्राप्त हुए, जिनमें से 33 का जवाब संबंधित विभागों को 30 दिनों में देने के निर्देश दिए गए।

अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि सत्र की शुरुआत उपराज्यपाल के अभिभाषण से हुई और धन्यवाद प्रस्ताव पर सत्तापक्ष व विपक्ष के 13 सदस्यों ने चर्चा की। यह प्रस्ताव 9 जनवरी को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके साथ ही, अगले सत्र से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण संस्करण बजाने का निर्णय लिया गया, जिसे सभी दलों ने मंजूरी दी।

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सत्र में गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ, वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ, और पर्यावरण संरक्षण व प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। हालिया विवादों पर बात करते हुए गुप्ता ने कहा कि सदस्यों को केवल मास्क पहनने के कारण निलंबित किए जाने का दावा भ्रामक है। निलंबन सदन में जानबूझकर बाधा डालने के कारण किया गया। साथ ही, सिख गुरुओं से संबंधित कथित टिप्पणियों के मामले को विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया और संबंधित वीडियो दिल्ली राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया।

चार प्रमुख विधेयक पारित

सत्र के दौरान चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए:

कोर्ट फीस दिल्ली संशोधन विधेयक 2026

दिल्ली विनियोग (संख्या-एक) विधेयक 2026

दिल्ली जन विश्वास संशोधन विधेयक 2026

दिल्ली दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2026

साथ ही वित्तीय वर्ष 2025–26 के अनुपूरक मांगों को भी मंजूरी दी गई। डिजिटल दस्तावेज़ीकरण अपनाने से 3.38 लाख पृष्ठों की बचत हुई, जिससे लगभग 40.56 पेड़ों का संरक्षण हुआ और 4–5 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई। प्रिंटिंग लागत में लगभग 1.69 लाख रुपये की बचत हुई।

अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह सत्र न केवल विधायी प्रक्रियाओं को मजबूत करने में मददगार रहा, बल्कि शहरी प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।

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