राजस्थान की राजधानी जयपुर से 50 किलोमीटर दूर बिचनू के पास एक भैराणा गांव है। वहाँ के एक किसान के पास करोड़पति बनने का फॉर्मूला है। आपको शायद ये पढ़कर हैरानी होगी, लेकिन ये बात सच है। किसान ने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी है। दावा है कि 3 साल बाद रोज 2 लाख रुपए कमाएंगे। अभी सालाना 30 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

भैराणा गांव के एक किसान सुरेंद्र अवाना ने अपनी 80 बीघा खेती में फॉर्मिंग मॉडल तैयार किया है। खेत में फिश पॉन्ड से लेकर पशु आहार तक की फैक्ट्री लगा दी है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा ब्रीडिंग सेंटर भी है, जहां केवल बछड़ियां ही पैदा होती हैं। यहां ऑर्गेनिक खेती के साथ साथ यहां गिर नस्ल की गाय के साथ डेयरी,  गाय के गोबर से प्रोडक्ट बनाने की फैक्ट्री, फ्रूट प्लांटेशन, ऑर्गेनिक खाद की फैक्ट्री से लेकर फिश और गोट एंड शीप फॉर्मिंग एक जगह होगी।यह फार्म किसी एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसा लगता है। यहां फार्मिंग से जुड़ा हर प्रयोग देखने को मिलेगा।

सुरेंद्र अवाना के फार्म पर  अभी 200 गिर नस्ल की गाय हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में 2 गिर गाय से शुरुआत की थी। तीन साल बाद 400 होंगी। मैंने ब्रीडिंग में सॉर्टेड सीमन तकनीक का प्रयोग किया हैं। इस तकनीक से केवल बछड़ियां ही पैदा हो रही हैं। दो साल में अब तक 60 बछड़ियां पैदा हो चुकी हैं।

गिर गाय  दूध की डेयरी से  रोज 250 लीटर दूध मिल रहा है। दूध 80 रुपए लीटर के हिसाब से बेचा जाता है। इस फार्म से हर महीने अभी करीब 2.50 लाख रुपए और सालाना 30 लाख रुपए की कमाई हो रही है।अवाना के फार्म पर गाय के गोबर में नेचुरल पोषक तत्व मिलाकर ऑर्गेनिक खाद तैयार की जाती है। इसके लिए वहीं पर फैक्ट्री है।

अवाना ने फार्म पर बायो फर्टिलाइजर बनाने की फैक्ट्री बना रखी है। इसी फैक्ट्री में एक मशीन लगाकर गाय के गोबर से गोकाष्ठ, दीपक, गमले, ईंट भी तैयार की जा रही हैं। बाजार में इन प्रोडक्ट्स को बेचकर सालाना लाखों रुपए कमा रहे हैं। अवाना पिछले 12 साल से रोज एक पेड़ लगा रहे हैं। फार्म पर विजिट के लिए आने वाले गेस्ट से भी वे पेड़ लगवाते हैं। इस फार्म पर 150 तरह के मेडिसिनल प्लांट लगे हैंं| सेव, आड़ू, स्ट्राबेरी जैसे ठंडे प्रदेशों में पैदा होने वाले फलदार पौधे भी इस फार्म पर लगाए गए हैं। इस साल सेब का प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।