धर्म

गिरजाबंध हनुमान मंदिर: यहां देवी स्वरूप में विराजते हैं बजरंगबली, भक्त करते हैं 16 श्रृंगार

गिरजाबंध हनुमान मंदिर में बजरंगबली को देवी स्वरूप में पूजा जाता है। जानिए मंदिर की अनोखी मान्यता, प्रतिमा और 16 श्रृंगार की परंपरा।

भारत में भगवान हनुमान के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित गिरजाबंध हनुमान मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां बजरंगबली को सामान्य पुरुष स्वरूप के बजाय नारी स्वरूप में विराजमान माना जाता है। यही वजह है कि मंदिर में हनुमान जी की पूजा का तरीका भी अन्य मंदिरों से काफी अलग है।

मान्यता के अनुसार, यहां भक्त बजरंगबली के देवी स्वरूप को माता के समान मानकर पूजा करते हैं। इतना ही नहीं, विशेष अवसरों पर हनुमान जी का सोलह श्रृंगार भी किया जाता है। मंदिर की इस अनूठी परंपरा के कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

देवी स्वरूप में दिखाई देते हैं बजरंगबली

गिरजाबंध हनुमान मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर एक विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि यहां बजरंगबली नारी स्वरूप में विराजमान हैं।

इस स्वरूप के कारण मंदिर में उनकी पूजा भी देवी की तरह की जाती है। भक्त प्रतिमा को माता का स्वरूप मानकर श्रृंगार करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यह परंपरा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में गिनी जाती है।

प्रतिमा के कंधों पर श्रीराम और माता सीता

मंदिर की प्रतिमा से जुड़ी एक और मान्यता इसे खास बनाती है। श्रद्धालुओं के अनुसार, हनुमान जी की प्रतिमा के कंधों पर भगवान श्रीराम और माता सीता के स्वरूप दिखाई देते हैं।

इसे भक्त हनुमान जी की श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति के प्रतीक के रूप में देखते हैं। इस वजह से प्रतिमा में हनुमान जी की भक्ति और शक्ति के साथ श्रीराम और माता सीता की उपस्थिति का अनोखा धार्मिक भाव दिखाई देता है।

राजा पृथ्वीदेव जू से जुड़ी है मंदिर की कहानी

गिरजाबंध हनुमान मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता रतनपुर के राजा पृथ्वीदेव जू से भी जोड़ी जाती है। कहा जाता है कि राजा भगवान हनुमान के परम भक्त थे। एक समय वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गए।

धार्मिक कथा के अनुसार, बीमारी के दौरान बजरंगबली ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और मंदिर निर्माण का निर्देश दिया। राजा ने इस आदेश को भगवान का आशीर्वाद मानकर मंदिर बनवाने का निर्णय लिया।

मंदिर का निर्माण होने के बाद गर्भगृह में किस प्रतिमा को स्थापित किया जाए, यह सवाल सामने आया। इसी दौरान मान्यता के अनुसार राजा को दोबारा हनुमान जी का स्वप्न में संदेश मिला।

also read:- रक्षाबंधन 2026: भाई से पहले किसे बांधें राखी? जानिए गणेश…

महामाया कुंड से मिली प्रतिमा?

स्थानीय धार्मिक मान्यता के मुताबिक, राजा को महामाया कुंड से एक प्रतिमा निकालकर मंदिर में स्थापित करने का निर्देश मिला था। इसके बाद जब कुंड से प्रतिमा प्राप्त हुई, तो उसका स्वरूप देखकर वहां मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए।

कहा जाता है कि प्रतिमा सामान्य हनुमान प्रतिमाओं से अलग थी और उसमें नारी स्वरूप दिखाई देता था। इसी प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किए जाने की मान्यता है।

हालांकि, यह कथा धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा का हिस्सा है। इसके ऐतिहासिक विवरण को लेकर अलग-अलग मत मिल सकते हैं।

बजरंगबली का होता है सोलह श्रृंगार

गिरजाबंध हनुमान मंदिर की सबसे अनोखी परंपराओं में बजरंगबली का सोलह श्रृंगार शामिल है। आमतौर पर हनुमान जी की पूजा में सिंदूर, चोला और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाने की परंपरा देखी जाती है।

लेकिन इस मंदिर में देवी स्वरूप की मान्यता के कारण विशेष अवसरों पर हनुमान जी का श्रृंगार माता की तरह किया जाता है। भक्त उन्हें देवी स्वरूप मानकर वस्त्र, आभूषण और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हैं।

यह अनूठी पूजा-पद्धति मंदिर को देश के अन्य हनुमान मंदिरों से अलग पहचान देती है।

क्यों खास है गिरजाबंध हनुमान मंदिर?

गिरजाबंध हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी खासियत बजरंगबली का नारी स्वरूप है। यहां उनकी पूजा केवल वीर योद्धा और भगवान श्रीराम के परम भक्त के रूप में नहीं, बल्कि देवी स्वरूप में भी की जाती है।

मंदिर की प्रतिमा, उसके साथ जुड़ी स्थानीय मान्यताएं और सोलह श्रृंगार की परंपरा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इसी वजह से रतनपुर का यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

जो श्रद्धालु भगवान हनुमान के अलग और अनोखे स्वरूप के दर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए यह मंदिर आस्था का एक खास केंद्र माना जाता है। गिरजाबंध हनुमान मंदिर से जुड़ी परंपराएं यह भी दिखाती हैं कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में देवी-देवताओं की पूजा और लोक आस्था के स्वरूप कितने विविध रहे हैं।

For English Newshttp://newz24india.in

Related Articles

Back to top button