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हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन: लोकसभा में 15 और विधानसभा में होंगी 120 सीटें, बदलेगा प्रदेश का राजनीतिक स्वरूप

हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन के बाद प्रदेश में बदलेंगे समीकरण। लोकसभा की 15 और विधानसभा की 120 सीटें होंगी। जानिए गुरुग्राम और फरीदाबाद में क्या बदलाव होंगे।

भारत की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। इस बड़े बदलाव के केंद्र में ‘परिसीमन’ की प्रक्रिया है, जिसका सीधा और व्यापक असर हरियाणा की राजनीति पर पड़ने वाला है। हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन के लागू होने के बाद प्रदेश की चुनावी सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण होगा, जिससे सांसदों और विधायकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी जाएगी।

लोकसभा और विधानसभा में बढ़ेंगी सीटें

नए परिसीमन के बाद देश में लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 850 होने का अनुमान है। वर्तमान में हरियाणा के पास लोकसभा की 10 सीटें हैं। यदि मौजूदा अनुपात को बरकरार रखा जाता है, तो हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन के बाद राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 10 से बढ़कर 15 हो जाएगी। इनमें से 5 सीटें विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।

वहीं, हरियाणा विधानसभा की बात करें तो अभी यहाँ 90 सीटें हैं। परिसीमन के नए आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 119 या 120 हो सकती है। इसमें से लगभग 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जिससे राज्य की नीति-निर्धारण प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका और सशक्त होगी।

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इन जिलों में बढ़ेगा राजनीतिक दबदबा

हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन के चलते सबसे बड़ा बदलाव शहरी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। 2011 की जनगणना और वर्तमान जनसंख्या वृद्धि के आंकड़ों के आधार पर फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और करनाल जैसे जिलों में विधानसभा सीटों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ने की संभावना है।

फरीदाबाद: 18 लाख से अधिक की आबादी के साथ सीटों में बड़ी वृद्धि।

गुरुग्राम: 15 लाख से अधिक आबादी, शहरी प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।

सोनीपत व करनाल: यहाँ भी नए विधानसभा क्षेत्र सृजित होंगे।

राजनीतिक प्रभाव: अब तक हरियाणा की राजनीति मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन नए परिसीमन के बाद राजनीति ‘शहरी केंद्रित’ हो सकती है। यह बदलाव क्षेत्रीय दलों के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है, जिनका आधार मुख्य रूप से ग्रामीण वोट बैंक रहा है।

नई विधानसभा भवन की आवश्यकता

सीटों की संख्या बढ़ने के कारण 2029 से पहले हरियाणा को एक नए और आधुनिक विधानसभा भवन की सख्त जरूरत होगी। वर्तमान विधानसभा भवन में विधायकों, अधिकारियों और मीडिया के लिए स्थान की कमी है। हरियाणा महिला आरक्षण और परिसीमन के बाद जब विधायकों की संख्या 120 तक पहुँचेगी, तो मौजूदा ढांचा छोटा पड़ जाएगा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के समय में चंडीगढ़ प्रशासन के साथ जमीन के आदान-प्रदान को लेकर चर्चा अंतिम चरण में थी, जिसे अब जल्द अमलीजामा पहनाना अनिवार्य हो गया है।

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