भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: पीएम मोदी बोले – करोड़ों लोगों के लिए खुले विकास के नए द्वार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को पीएम मोदी ने बताया “मदर ऑफ ऑल डील”। इस ऐतिहासिक करार से व्यापार, निवेश, रोजगार और वैश्विक आर्थिक सहयोग को मिलेगी नई मजबूती।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील” बताते हुए कहा कि यह करार भारत के 140 करोड़ नागरिकों और यूरोप के करोड़ों लोगों के लिए आर्थिक अवसरों का नया अध्याय खोलेगा। इस समझौते से न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक मजबूती और रणनीतिक साझेदारी को भी नई दिशा मिलेगी।
दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का ऐतिहासिक गठजोड़
इंडिया एनर्जी वीक के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो विशाल अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूत तालमेल का प्रतीक है। यह करार वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत और विश्व व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। पीएम मोदी ने कहा कि यह डील केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और पारदर्शिता जैसे साझा मूल्यों की पुष्टि भी करती है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री ने भारत की रिफाइनिंग क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश वर्तमान में दुनिया में दूसरे स्थान पर है और जल्द ही पहले स्थान पर पहुंचने की तैयारी में है। भारत की मौजूदा रिफाइनिंग क्षमता करीब 260 MMTPA है, जिसे बढ़ाकर 300 MMTPA तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यह वैश्विक निवेशकों के लिए बड़ा अवसर साबित होगा।
पेट्रोलियम निर्यात में भारत की मजबूत भूमिका
पीएम मोदी ने बताया कि भारत आज दुनिया के शीर्ष पांच पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों में शामिल है और 150 से अधिक देशों में निर्यात करता है। इससे स्पष्ट है कि भारत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक भरोसेमंद भागीदार बन चुका है।
18 साल की बातचीत के बाद बना समझौता
भारत-EU एफटीए पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। करीब 18 वर्षों की लंबी चर्चा के बाद इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया है। इसके औपचारिक ऐलान की उम्मीद भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में की जा रही है। समझौते के लागू होने से पहले यूरोपीय संसद और भारत की केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी।
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व्यापार को मिलेगा नया विस्तार
इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क में कटौती या समाप्ति की जाएगी। कपड़ा, फुटवियर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। इससे निर्यात बढ़ेगा, रोजगार सृजन होगा और उद्योगों को नई गति मिलेगी।
भारत-EU व्यापार का वर्तमान स्वरूप
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार 136 अरब डॉलर से अधिक रहा। इसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात करीब 61 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यह समझौता आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को और ऊंचाई तक पहुंचा सकता है।
आर्थिक भविष्य की ओर मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में और मजबूत बनाएगा, निवेश को आकर्षित करेगा और भारत-यूरोप संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदल देगा। पीएम मोदी के अनुसार, यह करार विकास, रोजगार और वैश्विक सहयोग की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
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