अमेरिका ने खोले दरवाजे: भारत को बांग्लादेश जैसी ‘जीरो ड्यूटी’ सुविधा, पीयूष गोयल ने संसद में दी गुड न्यूज़

भारत को अमेरिका से बांग्लादेश जैसी ‘जीरो ड्यूटी’ सुविधा, कपड़ा और कृषि उत्पाद सुरक्षित, पीयूष गोयल ने संसद में दी गुड न्यूज़।

भारत के कपड़ा उद्योग और निर्यातकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर बांग्लादेश जैसी ‘जीरो ड्यूटी’ सुविधा देने का ऐलान किया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बताया कि अमेरिकी कपास से बने भारतीय कपड़ों पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। इस समझौते से 90-95% कृषि उत्पादों को बाहर रखा गया है, जिससे भारतीय किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

अमेरिका के साथ जीरो ड्यूटी डील का महत्व

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में तय हुआ है कि भारतीय कपड़ा निर्यातकों को वही सुविधा मिलेगी जो बांग्लादेश को दी गई है। इसका अर्थ है कि अगर भारतीय निर्माता अमेरिका से कपास खरीदकर कपड़े तैयार करते हैं और उन्हें अमेरिका को निर्यात करते हैं, तो उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इसे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariff) के तहत देखा जा रहा है।

इस कदम से भारतीय कपड़ा उद्योग अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। पहले निर्यातकों को यह डर था कि अगर बांग्लादेश को ज्यादा छूट मिली और भारत को नहीं, तो ऑर्डर्स कम हो सकते हैं। अब प्रस्तावित समझौते ने इस चिंता को काफी हद तक दूर कर दिया है।

संसद में आमने-सामने आए पीयूष गोयल और राहुल गांधी

इस समझौते को लेकर संसद में सियासी बहस भी हुई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में भारत के मुकाबले बांग्लादेश को बेहतर शर्तें मिली हैं। इस दावे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश को मिली सुविधा के समान ही भारत को भी जीरो ड्यूटी का लाभ मिलेगा। अभी समझौते का ढांचा तैयार किया जा रहा है और फाइन प्रिंट में सभी शर्तें स्पष्ट रूप से सामने आएंगी।”

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कृषि उत्पाद सुरक्षित, किसानों की चिंता दूर

पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों के कारण भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा। इस समझौते में 90-95% कृषि उत्पादों को शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि विदेशी कृषि वस्तुएं भारतीय बाजार में बाढ़ नहीं लगाएंगी और किसानों की आमदनी सुरक्षित रहेगी।

इस समझौते से भारत के कपड़ा निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।

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