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जगन्नाथ रथ यात्रा: क्यों तोड़ा गया नंदीघोष रथ का पहिया? जानें हेरा पंचमी की पौराणिक कथा

जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी हेरा पंचमी कथा में नंदीघोष रथ का पहिया टूटने और माता लक्ष्मी के रसगुल्ले से मनाने की रोचक पौराणिक कहानी।

पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से जुड़ी परंपराएं और कथाएं हमेशा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। इसी बीच जगन्नाथ भक्तों में एक सवाल अक्सर उठता है कि आखिर क्यों नंदीघोष रथ का पहिया तोड़ा गया था। यह पूरा प्रसंग “जगन्नाथ रथ यात्रा” की हेरा पंचमी कथा से जुड़ा हुआ है, जो प्रेम और भक्ति का अनोखा संदेश देती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा और हेरा पंचमी का महत्व

आषाढ़ शुक्ल पंचमी को हेरा पंचमी कहा जाता है। यह दिन “जगन्नाथ रथ यात्रा” के दौरान एक विशेष महत्व रखता है। इस दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से मिलने गुंडीचा मंदिर जाती हैं, जहां से इस रोचक कथा की शुरुआत होती है।

मान्यता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ गुंडीचा मंदिर चले जाते हैं, जिससे माता लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।

नंदीघोष रथ का पहिया कैसे टूटा?

कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ के जाने से क्रोधित हो जाती हैं। इसी दौरान वे अपने सेवकों को आदेश देती हैं कि भगवान जगन्नाथ के रथ “नंदीघोष” का एक पहिया तोड़ दिया जाए।

यह घटना जगन्नाथ रथ यात्रा में माता लक्ष्मी की नाराजगी और प्रेम दोनों को दर्शाती है। बाद में वे गुप्त मार्ग से श्री मंदिर लौट आती हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा में बहुदा यात्रा और नीलाद्रि बिजे

जगन्नाथ रथ यात्रा के नौवें दिन भगवान वापसी करते हैं, जिसे बहुदा यात्रा कहा जाता है। इसके बाद नीलाद्रि बिजे अनुष्ठान होता है, जहां भगवान जगन्नाथ श्री मंदिर लौटते हैं।

लेकिन माता लक्ष्मी के आदेश से उन्हें द्वार पर रोक दिया जाता है, जिससे यह कथा और भी रोचक हो जाती है।

रसगुल्ले से मनाया गया प्रेम

कहा जाता है कि रथ यात्रा की इस कथा में अंत बेहद मीठा होता है। भगवान जगन्नाथ माता लक्ष्मी को मनाने के लिए उन्हें रसगुल्ले अर्पित करते हैं।

रसगुल्ले की मिठास और प्रेम के कारण माता लक्ष्मी का गुस्सा शांत हो जाता है और वे भगवान को स्वीकार कर लेती हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा का संदेश

रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाली पौराणिक कथा है। यह हमें सिखाती है कि सच्चे प्रेम में नाराजगी के बाद भी मिठास लौट आती है।

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