कुंभ संक्रांति 2026: 12 या 13 फरवरी? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व
जानें कुंभ संक्रांति 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व। 13 फरवरी को सूर्य देव का गोचर और पूजा विधि के साथ।
कुंभ संक्रांति 2026: कुंभ संक्रांति हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और शुभ अवसर माना जाता है। हर साल इस दिन को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन रहती है कि संक्रांति की सही तिथि क्या है। इस बार भी सवाल उठ रहा है कि कुंभ संक्रांति 12 फरवरी को है या 13 फरवरी को। पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में कुंभ संक्रांति 13 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
इस दिन सूर्य देव मकर राशि को छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इस साल सूर्य का गोचर सुबह 4 बजकर 14 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, संक्रांति के शुभ काल में किया गया दान और स्नान अत्यंत फलदायी होता है और जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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कुंभ संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त
कुंभ संक्रांति 2026 के दिन पूजा और स्नान के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
सूर्य देव का गोचर: 13 फरवरी 2026, सुबह 4:14 AM
स्नान और दान का पुण्यकाल: सुबह जल्दी उठकर किया गया स्नान और दान विशेष लाभकारी माना जाता है।
पूजा विधि: तांबे के लोटे में गंगाजल लें, उसमें लाल फूल, कुमकुम और अक्षत डालें। सूर्य देव को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
पूजा के बाद अनाज, तिल, कपड़े या अन्य दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में शांति व समृद्धि आती है।
कुंभ संक्रांति का धार्मिक महत्व
कुंभ संक्रांति को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, गोदावरी और नर्मदा में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि सूर्य देव की पूजा और दान से स्वास्थ्य लाभ होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सफलता और सुख-समृद्धि आती है।
विशेष रूप से इस दिन किए गए धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और स्नान का महत्व अत्यंत माना जाता है। संक्रांति के अवसर पर सूर्य देव की उपासना और पूजा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली मानी जाती है।
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