राज्यदिल्ली

सीएम रेखा गुप्ता के आदेश की उड़ी धज्जियां, निरीक्षण के बाद भी GST ऑफिस में नहीं दिखे अधिकारी

दिल्ली में सीएम रेखा गुप्ता के आदेश की अनदेखी। जीएसटी दफ्तर के निरीक्षण के बाद भी जॉइंट कमिश्नर अपनी कुर्सी से नदारद मिले। पढ़ें दिल्ली की बड़ी खबर।

राजधानी में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सख्ती के बावजूद जमीनी हकीकत बदलती नजर नहीं आ रही है। सीएम रेखा गुप्ता के आदेश के महज दो दिन बाद ही दिल्ली स्टेट जीएसटी दफ्तर में फिर वही पुरानी लापरवाही देखने को मिली। जब मीडिया टीम ने ग्राउंड पर जाकर रियलिटी चेक किया, तो मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों का असर कहीं दिखाई नहीं दिया।

मुख्यमंत्री के औचक निरीक्षण का नहीं हुआ असर

दो दिन पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्टेट जीएसटी दफ्तर का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी कुर्सियों से नदारद पाए गए थे। इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए सीएम रेखा गुप्ता के आदेश जारी किए गए थे कि सभी अधिकारी सुबह 9:30 बजे तक कार्यालय पहुंचें और शाम 6:00 बजे तक अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें। लेकिन आज फिर उसी ऑफिस में जॉइंट कमिश्नर केबिन में मौजूद नहीं मिले।

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जॉइंट कमिश्नर की कुर्सी मिली खाली

हैरानी की बात यह है कि जिस दफ्तर का मुख्यमंत्री ने खुद जायजा लिया था, वहां आज भी स्थिति जस की तस है। रियलिटी चेक के दौरान जॉइंट कमिश्नर गुरप्रीत सिंह अपने कार्यालय में नहीं पाए गए। इतना ही नहीं, उनके निजी सहायक (PA) भी गायब थे। सीएम रेखा गुप्ता के आदेश की इस तरह की अवहेलना दिल्ली सरकार के प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है।

प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही की कमी

सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और समयबद्धता लाने के लिए सीएम रेखा गुप्ता के आदेश बहुत स्पष्ट थे। मुख्यमंत्री ने साफ कहा था कि किसी भी हाल में जनता के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन जीएसटी विभाग के उच्च अधिकारियों की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि सिस्टम के भीतर जवाबदेही का भारी अभाव है। जब खुद मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद भी अधिकारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंच रहे, तो आम जनता की सुनवाई कैसे होगी?

सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की अनुपस्थिति का नहीं है, बल्कि सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना का है। सीएम रेखा गुप्ता के आदेश की धज्जियां उड़ना यह साबित करता है कि दफ्तरों में बाबूशाही और अनुशासनहीनता की जड़ें कितनी गहरी हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री इस ताजी लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई करती हैं।

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