Makar Sankranti और Ekadashi 2026: 23 साल बाद बन रहा खास संयोग, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Makar Sankranti और Ekadashi का दुर्लभ संयोग 2026 में, 23 साल बाद बन रहा है। जानें सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा विधि, शुभ मुहूरत और व्रत का महत्व।
इस साल Makar Sankranti और Ekadashi का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो 23 वर्षों में पहली बार दिखाई दे रहा है। 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश होने के साथ ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। साथ ही माघ कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी का व्रत भी उसी दिन रहेगा। ऐसे खास अवसर पर भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करने से सभी बिगड़े काम बनते हैं और विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
Makar Sankranti का महत्व
Makar Sankranti हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे हर साल माघ मास में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान, सूर्य देव की पूजा और विशेष मंत्रोच्चारण करने का परंपरागत महत्व है।
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से 5:45 बजे तक रहेगा, जबकि महा पुण्यकाल 3:13 बजे से 4:58 बजे तक रहेगा।
Ekadashi का महत्व
Ekadashi भगवान विष्णु को समर्पित तिथि होती है। इस दिन व्रत रखने, विष्णु मंत्रों का जप और पूजा-उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का व्रत भी मनाया जाएगा, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठें और सूर्य देव तथा भगवान विष्णु का ध्यान करें।
पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें।
तांबे के लोटे में अक्षत और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
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मंत्र जाप करें:
“ऊँ सूर्याय नम:”
“ऊँ खगाय नम:”
“ऊँ भास्कराय नम:”
“ऊँ रवये नम:”
“ऊँ भानवे नम:”
“ऊँ आदित्याय नम:”
इसके बाद सूर्य स्तुति का पाठ करें।
षटतिला एकादशी पूजा विधि
स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।
गंगाजल का छिड़काव करके लाल आसन पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें।
पूजा के दौरान गोपी चंदन, फल-फूल और तुलसी पत्र चढ़ाएं।
देसी घी का दीपक और कपूर जलाएं।
पंचामृत, मिठाई, तिलकुट आदि का भोग लगाएं, भोग में तुलसी पत्र शामिल करें।
विष्णु मंत्रों का जाप करें और एकादशी कथा का पाठ करें।
अंत में भगवान की आरती करें।
इस खास संयोग के दिन मकर संक्रांति और एकादशी की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है। 23 साल में एक बार बन रहा यह अद्भुत योग भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
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