मोहिनी एकादशी 2026: 27 अप्रैल को व्रत, भगवान विष्णु की कृपा से मिलेंगे सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति
मोहिनी एकादशी 2026: मोहिनी एकादशी का व्रत इस वर्ष 27 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि आती है।
मोहिनी एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है। वर्ष में कुल 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन मोहिनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्याओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति मोह-माया से मुक्त होकर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है। साथ ही घर में धन, वैभव और सुख-समृद्धि का वास होता है।
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मोहिनी एकादशी 2026 तिथि
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 26 अप्रैल 2026 को शाम 06:08 बजे शुरू होकर 27 अप्रैल 2026 को शाम 06:17 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा।
व्रत और पूजा विधि
मोहिनी एकादशी के दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं और पीले वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जाता है।
पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, पीले फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। रात्रि में भजन-कीर्तन और दीपदान का विशेष महत्व होता है। अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दिया जाता है।
धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत कलश को लेकर देवताओं और राक्षसों के बीच विवाद हुआ था। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर राक्षसों को भ्रमित किया और देवताओं को अमृत प्राप्त करने में सहायता की। माना जाता है कि यह घटना वैशाख शुक्ल एकादशी को हुई थी, तभी से इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है।
शास्त्रों में महत्व
स्कंद पुराण और पद्म पुराण में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत से जाने-अनजाने सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसे तप, यज्ञ और अन्य धार्मिक कर्मों से भी अधिक फलदायी माना गया है।
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