वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत 2026: 28 या 29 अप्रैल? जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत 2026 को लेकर संशय खत्म हो गया है। जानें सही तारीख 28 या 29 अप्रैल, पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और संपूर्ण विधि।
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत को लेकर इस बार भक्तों के बीच खासा संशय बना हुआ है कि यह व्रत 28 अप्रैल को रखा जाएगा या 29 अप्रैल को। हिंदू पंचांग के अनुसार तिथि की गणना के आधार पर इसकी सही तारीख स्पष्ट हो गई है। आइए जानते हैं वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत की सही डेट, पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि।
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि 28 अप्रैल 2026 को शाम 06:51 बजे से शुरू होकर 29 अप्रैल को शाम 07:51 बजे तक रहेगी। चूंकि प्रदोष व्रत का पूजन प्रदोष काल में किया जाता है, इसलिए यह व्रत 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को रखा जाएगा।
इस दिन मंगलवार होने के कारण यह भौम प्रदोष व्रत कहलाएगा।
यही कारण है कि इस वर्ष वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को ही मनाया जाएगा।
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:54 बजे से रात 09:04 बजे तक
इस समय में की गई पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इसी अवधि में वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत का पूजन करना सबसे फलदायी माना गया है।
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वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,अंतिम प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का अत्यंत प्रभावशाली उपाय है। इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, सुख-समृद्धि आती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
विशेषकर भौम प्रदोष व्रत मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को भी शांत करने में सहायक माना जाता है।
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत की पूजा विधि
वैशाख माह का अंतिम प्रदोष व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है:
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें
- भगवान शिव की पूजा के लिए बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, अक्षत, धूप, दीप और गंगाजल तैयार करें
- संध्या समय पुनः स्नान कर शुद्ध होकर पूजा प्रारंभ करें
- शिवलिंग का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें
- बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
- प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें
- अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें
इस विधि से किया गया अंतिम प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ फल देता है।
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