NEET पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट ने NTA को लगाई फटकार, निगरानी तंत्र पर उठाए सवाल
NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA को फटकार लगाई और निगरानी तंत्र पर सवाल उठाते हुए केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा।
NEET पेपर लीक से जुड़े मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से सवाल किया कि मजबूत निगरानी तंत्र और समितियों के बावजूद NEET पेपर लीक जैसी गंभीर चूक कैसे हुई।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश की प्रतिष्ठित परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। कोर्ट ने यूपीएससी परीक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं वहां नहीं होतीं, इसलिए अन्य संस्थाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब पहले से निगरानी समितियां और उच्च स्तरीय तंत्र मौजूद थे, तब भी NEET पेपर लीक जैसी बड़ी गड़बड़ी कैसे हो गई।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने कहा कि केवल समितियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके कार्यान्वयन की वास्तविक निगरानी जरूरी है।
समिति की भूमिका पर चर्चा
कोर्ट ने डॉ. राधाकृष्णन से पूछा कि सिफारिशों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में क्या कमी रह गई, जिसके कारण NEET पेपर लीक हुआ।
अदालत ने यह भी कहा कि संस्थागत जवाबदेही तय किए बिना NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकना मुश्किल है।
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सरकार से विस्तृत हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विस्तृत हलफनामा दाखिल करे जिसमें परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और विशेषज्ञों की भूमिका को स्पष्ट किया जाए।
सुनवाई में कहा गया कि NEET पेपर लीक की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
पीएम मोदी की निगरानी का उल्लेख
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
छात्रों के हितों पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों और उनके परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डालती हैं।
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