NEET-UG री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम बैन पर केजरीवाल ने सवाल उठाए, पेपर लीक रोकने के सरकारी कदमों को बताया अप्रभावी।
NEET-UG 2026 के री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अप्रभावी बताया और कहा कि सरकार के पास पेपर लीक रोकने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने घोषणा की है कि NEET-UG री-टेस्ट, जो 21 जून को आयोजित होना है, उससे पहले 22 जून तक टेलीग्राम पर प्रतिबंध लागू रहेगा। यह कदम परीक्षा में नकल और गलत सूचना फैलाने को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह के अनुसार, यह अस्थायी प्रतिबंध परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि NEET-UG री-टेस्ट बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न हो।
मोदी सरकार की पेपर लीक रोकने की नीयत ही नहीं है। इसलिए इस तरह के बेतुके कदम उठाये जा रहे हैं। सेना के जहाज़ों से पेपर ट्रांसपोर्ट करना, टेलीग्राम बंद करना। क्या इन कदमों से पेपर लीक बंद होंगे? बिल्कुल नहीं।
पेपर लीक का धंधा अरबों का धंधा है। पैसा टॉप तक जाता है। पेपर लीक बंद कर… https://t.co/skWpWOBocY
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 17, 2026
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हालांकि, इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के उपाय पेपर लीक की मूल समस्या का समाधान नहीं कर सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समस्या की जड़ तक पहुंचने में विफल रही है।
केजरीवाल ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए केवल ऐप बैन या सख्त कदम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे के बड़े नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह एक संगठित रैकेट बन चुका है, जिसमें बड़े स्तर पर धन का लेन-देन होता है और प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी हो सकती है।
सरकार की ओर से सुरक्षा के तहत Google और Apple को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे 22 जून तक टेलीग्राम को अपने ऐप स्टोर से हटाएं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब NEET-UG परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया गया था, क्योंकि 3 मई को आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगे थे। इस फैसले से देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थी प्रभावित हुए थे और लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे।
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