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NTPC का बड़ा कदम: भारत-अमेरिका साझेदारी से थोरियम आधारित न्यूक्लियर ऊर्जा को नई दिशा

NTPC ने अमेरिका की कंपनी के साथ साझेदारी की, थोरियम आधारित न्यूक्लियर फ्यूल से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिलेगी।

भारत की ऊर्जा रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश की सबसे बड़ी पावर कंपनी NTPC अब न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में कदम रख रही है और अमेरिका की एक अग्रणी न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ साझेदारी की तैयारी कर रही है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य थोरियम आधारित न्यूक्लियर फ्यूल को भारत में आगे बढ़ाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

थोरियम पर क्यों है भारत का ध्यान

भारत के पास सीमित यूरेनियम भंडार हैं, जबकि थोरियम के भंडार दुनिया में सबसे बड़े हैं। यही कारण है कि थोरियम को देश की ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य माना जाता रहा है। थोरियम से बिजली उत्पादन लंबे समय तक भरोसेमंद और टिकाऊ हो सकता है, साथ ही इससे न्यूक्लियर कचरा भी कम होता है।

NTPC और अमेरिकी कंपनी की रणनीतिक साझेदारी

शिकागो स्थित अमेरिकी न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी कंपनी भारत में NTPC के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रही है। इस साझेदारी के तहत NTPC कंपनी में सीमित हिस्सेदारी ले सकती है। इसका उद्देश्य नई तकनीक तक पहुंच बनाना और भविष्य की न्यूक्लियर फ्यूल जरूरतों के लिए तैयारी करना है।

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मौजूदा रिएक्टरों में भी इस्तेमाल संभव

इस सहयोग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि थोरियम आधारित नया फ्यूल भारत के मौजूदा प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे देश को नए रिएक्टर बनाने की जरूरत नहीं होगी, लागत कम होगी और ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा।

नए कानून से खुला रास्ता

हाल ही में पास हुए न्यूक्लियर एनर्जी कानून ने निजी और विदेशी कंपनियों को भारत के न्यूक्लियर सेक्टर में सीमित भूमिका निभाने का अवसर दिया है। यह विशेष रूप से फ्यूल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लागू होता है। इससे भारत को आधुनिक तकनीक और निवेश दोनों मिल सकते हैं।

ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

थोरियम आधारित फ्यूल के बढ़ते उपयोग से भारत की आयातित न्यूक्लियर ईंधन पर निर्भरता कम होगी। इससे बिजली उत्पादन की लागत घटेगी और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत अपने तीन-चरणीय न्यूक्लियर प्रोग्राम को नई गति दे सकता है और भविष्य में पूरी तरह थोरियम आधारित ऊर्जा सिस्टम की नींव रख सकता है।

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