प्रदूषण से बचाव के तरीके: प्रेग्नेंट महिलाएं प्रदूषण से अपने और गर्भ में पल रहे बच्चे को कैसे बचा सकती हैं? इंडिया टीवी पर डॉक्टरों ने बताए आसान और प्रभावी उपाय।
प्रदूषण से बचाव: बढ़ता प्रदूषण सिर्फ वयस्कों के लिए ही खतरनाक नहीं है, बल्कि प्रेग्नेंट महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। इंडिया टीवी पर आयोजित “Pollution Ka Solution” में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रदूषण से बचाव के व्यावहारिक उपाय साझा किए।
इस चर्चा में डॉ. नीना सिंह कुमार (प्रधान निदेशक, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, मैक्स हेल्थकेयर), डॉ. दुर्गेश (सलाहकार, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विज्ञान संस्थान और आरएमएल अस्पताल) और डॉ. रमेश अग्रवाल (प्रोफेसर, बाल चिकित्सा विभाग, एम्स) ने महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स दिए।
प्रदूषण से जुड़ी खतरनाक समस्याएं
डॉ. नीना सिंह के अनुसार, प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रदूषण के कारण ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। गर्भ में पल रहे बच्चे में ऑक्सीजन और रक्त की कमी हो सकती है, जिससे बच्चे की वृद्धि प्रभावित होती है। डॉ. दुर्गेश ने बताया कि दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों में अर्ली प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन के मामले भी बढ़ रहे हैं।
प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रदूषण से बचाव के उपाय
इंडिया टीवी पर बातचीत के दौरान डॉक्टरों ने कई व्यावहारिक उपाय सुझाए:
घर में रहकर सावधानी: दिल्ली जैसी प्रदूषित जगह पर प्रेग्नेंट महिलाओं को संभव हो तो घर में ही रहने की कोशिश करनी चाहिए।
एक्सहॉस्ट और वेंटिलेशन: रसोई में अच्छा एक्सहॉस्ट फैन लगाएं और धूप या अगरबत्ती के धुएं से बचें।
घर में हरियाली: घर में पौधे लगाना भी हवा को शुद्ध करने में मदद करता है।
मास्क का उपयोग: घर से बाहर निकलते समय हमेशा N-95 मास्क पहनें।
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डॉ. दुर्गेश ने स्पष्ट किया कि केवल एयर प्यूरिफायर लगाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होती। आम लोगों को प्रदूषण के खतरनाक प्रभावों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। डॉ. रमेश ने कहा कि प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना ही असली समाधान है, न कि केवल घर पर बंद रहना या वर्क फ्रॉम होम करना।
गर्भ और बच्चे पर दीर्घकालिक प्रभाव
डॉ. नीना के अनुसार, अगर प्रेग्नेंसी के दौरान प्रदूषण से बचाव नहीं किया गया, तो बच्चे के जन्म के बाद ऑटिज्म, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. दुर्गेश ने यह भी चेताया कि प्रदूषण के बढ़ते प्रकोप के कारण बेबी प्लानिंग पर ध्यान देना जरूरी हो सकता है। डॉ. रमेश ने कहा कि प्रदूषण स्लो पॉइजन की तरह माता और बच्चे दोनों पर जीवन भर बुरा असर डाल सकता है।
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