पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मजदूर दिवस पर डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय और समानता के संदेश को साझा किया। पढ़ें पूरी खबर।
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और उनके महान योगदान को याद करते हुए उन्हें सामाजिक न्याय का सच्चा मार्गदर्शक बताया। पंजाब के एडवोकेट जनरल (AG) कार्यालय में कार्यरत लॉ ऑफिसर्स द्वारा आयोजित एक विशेष सेमिनार में शिरकत करते हुए चीमा ने डॉ. अंबेडकर की विरासत और उनके संवैधानिक मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. अंबेडकर: भारतीय संविधान के शिल्पकार और समानता के प्रतीक
सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने डॉ. बी. आर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का प्रमुख शिल्पकार और मानव गरिमा का रक्षक बताया। चर्चा का मुख्य केंद्र डॉ. अंबेडकर द्वारा समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए किए गए संघर्ष और उनके द्वारा स्थापित न्यायपूर्ण सिद्धांतों पर रहा।
On the eve of Labour Day, attended a seminar on the life and legacy of B. R. Ambedkar, organised by the Law Officers at the Office of the Advocate General, Punjab.
There is so much to learn from the Father of our Constitution—his unwavering commitment to justice, equality, and… pic.twitter.com/geCoHlCQRE
— Adv Harpal Singh Cheema (@HarpalCheemaMLA) May 2, 2026
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के संबोधन के मुख्य अंश:
अटूट प्रेरणा: चीमा ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की यात्रा नहीं, बल्कि न्याय और अधिकारों के लिए लड़ी गई एक ऐतिहासिक जंग है, जो आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है।
समतामूलक समाज का निर्माण: उन्होंने जोर देकर कहा कि बाबा साहेब के सिद्धांतों को अपनाकर ही एक सशक्त और भेदभाव मुक्त समाज का सपना साकार किया जा सकता है।
मूल्यों को अपनाने की अपील: वित्त मंत्री ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की कि वे केवल डॉ. अंबेडकर की पूजा न करें, बल्कि उनके बताए ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मार्ग पर चलें।
लॉ ऑफिसर्स और विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम में पंजाब सरकार के लॉ ऑफिसर्स और न्यायिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था में संविधान की सर्वोच्चता और डॉ. अंबेडकर द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के महत्व को रेखांकित किया। वक्ताओं ने बताया कि कैसे बाबा साहेब ने कानून को सामाजिक परिवर्तन के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
मजदूर दिवस और डॉ. अंबेडकर का संबंध
मजदूर दिवस (1 मई) से ठीक पहले आयोजित इस कार्यक्रम का विशेष महत्व रहा। डॉ. अंबेडकर ने न केवल दलितों और पिछड़ों के लिए काम किया, बल्कि उन्होंने भारत में श्रमिकों के लिए 8 घंटे काम की अवधि, मातृत्व लाभ और न्यूनतम मजदूरी जैसे क्रांतिकारी सुधारों की नींव रखी थी। सेमिनार का उद्देश्य श्रमिकों के अधिकारों और उनके सामाजिक सम्मान को डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण से जोड़कर प्रस्तुत करना था।
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